*-अर्जुन झा-*
*जगदलपुर।* क्या अपने विधायक पिता कवासी लखमा के निर्वाचन क्षेत्र कोंटा की कमान पुत्र हरीश कवासी ने सम्हाल ली है? क्या अगर कवासी लखमा को कोर्ट से सजा हो गई तो कवासी लखमा के विकल्प के तौर पर उभरने के प्रयास में हैं हरीश कवासी? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि पिता कवासी लखमा पर लगी अदालती बंदिशों के बाद उनके बेटे हरीश कवासी कोंटा क्षेत्र में कुछ ज्यादा ही सक्रिय हो गए हैं। हरीश कवासी दूर बसे गांवों का भी धुंआधार दौरा कर रहे हैं।
सुकमा जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरीश कवासी कोंटा क्षेत्र के दो दिवसीय दौरे पर निकले हुए हैं। दौरे के दौरान उन्होंने मिनपा, बुर्कापाल, एलमागुंडा, डब्बामरका, किस्टाराम सहित कई पंचायतों में बैठकों का आयोजन किया। उनके समक्ष ग्रामीणों ने अपनी मूलभूत समस्याएं सड़क, पेयजल, राशन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मामलों को खुलकर रखीं। सत्ता सरकार जहां जनता की सेवा में विफल रही, वहीं हरीश कवासी ने लोगों की समस्याएं सुनकर उन्हें प्रशासन तक पहुंचाने और अधिकार दिलाने की लड़ाई लड़ने का भरोसा दिलाया। कांग्रेस के काफिले के गांव पहुंचने पर पटेल, पुजारी, गायत, सिरहा और मांझी सहित ग्रामीणों ने नेताओं का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। उल्लेखनीय है कि कोंटा के मौजूदा विधायक कांग्रेस के दिग्गज नेता कवासी लखमा हैं। वे इस सीट से लगातार छठवीं बार जीतकर आए हैं। पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार में कवासी लखमा आबकारी एवं उद्योग मंत्री भी रहे हैं। उनके कार्यकाल के दौरान हजारों करोड़ के शराब घोटाले का मामला सामने आया था। इस मामले में ईडी ने कई बड़े अधिकारियों समेत पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को भी आरोपी नामजद किया है। ईडी ने कवासी लखमा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। कई माह बाद सुप्रीम कोर्ट से सशर्त अंतरिम जमानत पर कवासी लखमा जेल से छूटे हैं। शर्त के मुताबिक उन्हें अपने क्षेत्र से बाहर रहना होगा, मगर जमानत मिलते ही श्री लखमा सबसे पहले अपने गृहनगर सुकमा पहुंचे थे, जहां उनका कार्यकर्ताओं ने किसी अजेय योद्धा की तरह स्वागत किया था।. इस दौरान कवासी लखमा मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव और जिला भाजपा अध्यक्ष धनीराम बारसे पर जमकर बरसे थे। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में शामिल होने के लिए स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने विधायक कवासी लखमा को कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दी है। विधानसभा में पहुंचते ही श्री लखमा सबसे पहले भाजपा के विधायकों और मंत्रियों से गले मिलते नजर आए थे। बहरहाल मुद्दा यह है कि अगर आबकारी घोटाले में कवासी लखमा को सजा हो गई, तो कोंटा में उनका विकल्प कौन होगा? जाहिर सी बात है कि कांग्रेस की रीति नीति और परंपरा के अनुसार उनके बेटे हरीश कवासी ही उनके राजनैतिक वारिस होंगे। यही वजह है कि हरीश कवासी लगातार कोंटा क्षेत्र में सक्रिय नजर आ रहे हैं।
