बिलासपुर, 22 फरवरी 2026 (दुर्ग भिलाई अपडेट)।
आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) के लिए केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2019 में लागू किए गए 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ छत्तीसगढ़ के युवाओं को अब तक नहीं मिल सका है। सात वर्ष बीत जाने के बाद भी राज्य में यह प्रावधान प्रभावी नहीं हो पाया है, जिसके कारण हजारों पात्र युवा शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण के लाभ से वंचित हैं।
केंद्र में 2019 से लागू है ईडब्ल्यूएस प्रावधान
नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में संविधान संशोधन के माध्यम से सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान दिया था। देश के कई राज्यों में यह व्यवस्था लागू भी हो चुकी है, लेकिन छत्तीसगढ़ में अब तक इसे प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा सका है।
राज्य में इस दौरान कांग्रेस और भाजपा, दोनों दलों की सरकारें रहीं, परंतु ईडब्ल्यूएस आरक्षण पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका।
हाईकोर्ट की सख्ती
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता पुष्पराज सिंह एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा कि प्रदेश में ईडब्ल्यूएस आरक्षण अब तक लागू क्यों नहीं किया गया।
कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
याचिका में तर्क दिया गया है कि जब मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू है, तो छत्तीसगढ़ के युवाओं को इससे वंचित रखना समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
76 प्रतिशत आरक्षण का विवाद बना रोड़ा
दिसंबर 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार ने राज्य में कुल आरक्षण सीमा 76 प्रतिशत करने का विधेयक पारित किया था।
इस प्रस्ताव में —
एसटी: 32%
एससी: 13%
ओबीसी: 27%
ईडब्ल्यूएस: 4%
आरक्षण का प्रावधान शामिल था।
हालांकि, यह कुल सीमा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत सीमा से अधिक थी, जिसके चलते मामला कानूनी जटिलताओं में उलझ गया। राजभवन और न्यायिक प्रक्रिया के बीच विधेयक अटक गया और ईडब्ल्यूएस प्रावधान प्रभावी नहीं हो सका।
वर्तमान सरकार के सामने चुनौती
वर्तमान में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में भाजपा सरकार है। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद अब यह स्पष्ट करना आवश्यक हो गया है कि राज्य सरकार केंद्र के अनुरूप 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण को अलग से लागू करेगी या पूर्ववर्ती विवादित विधेयक के समाधान की प्रतीक्षा करेगी।
भाजपा के वरिष्ठ विधायक व पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने पूर्ववर्ती सरकार को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि आरक्षण का राजनीतिकरण किया गया, जिससे संवैधानिक प्रावधान उलझनों में फंस गए।
युवाओं में असंतोष
सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं का कहना है कि जब केंद्र स्तर पर विधिवत कानून बनाया जा चुका है, तो राज्य में इसे लागू न करना अन्यायपूर्ण है। अधिवक्ताओं का मत है कि अन्य राज्यों में लागू व्यवस्था के बावजूद छत्तीसगढ़ में सात वर्षों की देरी समझ से परे है।
अब निगाहें राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या सरकार केंद्र के 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस प्रावधान को स्वतंत्र रूप से लागू कर संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित करेगी, या यह मामला राजनीतिक एवं कानूनी जटिलताओं में ही उलझा रहेगा — यह आने वाला समय तय करेगा।
फिलहाल, छत्तीसगढ़ के हजारों आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के युवा अवसर की प्रतीक्षा में हैं।
