कोरबा, 14 फरवरी (दुर्ग भिलाई अपडेट)। जिले में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा घटनाक्रम में कटघोरा क्षेत्र में लगभग 40 हाथियों के विशाल दल ने दस्तक देकर ग्रामीणों में दहशत फैला दी। बीती रात हाथियों की लगातार गतिविधियों से न केवल ग्रामीण बल्कि खबर कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों को भी जान बचाकर भागना पड़ा।
◼ 10 से अधिक घर तोड़े, मवेशियों को भी नुकसान
कटघोरा वनमंडल के जटगा रेंज अंतर्गत धोबीबारी गांव में दो दिन पहले हाथियों के दल ने भारी तबाही मचाई। जानकारी के अनुसार करीब 10 घरों को तोड़ दिया गया और कुछ पालतू जानवरों को भी मार डाला गया। अचानक हुए हमले से गरीब परिवारों का आशियाना उजड़ गया। प्रभावित ग्रामीण अब खुले आसमान के नीचे पेड़ों के सहारे रात गुजारने को मजबूर हैं।
◼ घंटों तक अंधेरे में फंसे रहे ग्रामीण और पत्रकार
हाथियों द्वारा मचाई गई तबाही की खबर कवरेज करने पहुंचे पत्रकार — शारदा पाल, नानक सिंह राजपूत, लक्ष्मण महंत और हरीश साहू — भी ग्रामीणों के साथ खतरे में घिर गए। हाथियों ने इलाके से निकलने का एकमात्र रास्ता रोक दिया, जिससे सभी लोग घंटों तक अंधेरे में फंसे रहे। हाथियों की चिंघाड़ और लगातार मूवमेंट के बीच पूरी रात भय का माहौल बना रहा। किसी तरह सुरक्षित स्थान पर पहुंचकर सभी ने राहत की सांस ली।
◼ वन अमले की सतर्कता पर उठे सवाल
घटना ने एक बार फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों की लगातार मूवमेंट की जानकारी होने के बावजूद समय पर चेतावनी और सुरक्षा व्यवस्था नहीं की जाती। पूरी रात क्षेत्र में कोई जिम्मेदार वन अधिकारी या अमला नजर नहीं आया।
◼ ग्रामीणों में भारी आक्रोश
लगातार हो रहे नुकसान और समय पर सहायता नहीं मिलने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सतर्कता बरती जाती तो इतना बड़ा नुकसान टाला जा सकता था।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मुआवजा, सुरक्षा व्यवस्था और हाथियों की निगरानी के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
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