बकावंड (अर्जुन झा)
बकावंड ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम करपावंड के पास हुए सड़क हादसे में घायल होने के बाद हम लोगों को तत्काल इलाज के लिए नजदीकी शासकीय अस्पताल ले जाया गया। लेकिन वहां का नजारा देखकर साफ हो गया कि यह अस्पताल सिर्फ नाम का है, सुविधाओं के नाम पर शून्य।
इमरजेंसी वार्ड में पहुंचने के बावजूद प्राथमिक उपचार तक उपलब्ध नहीं था। न टिटनेस इंजेक्शन, न दर्द की दवा, न कोई जरूरी मेडिसिन। अस्पताल स्टाफ ने साफ शब्दों में बाहर मेडिकल दुकान से दवा खरीदकर लाने को कह दिया। सवाल यह है कि अगर मरीज ही बाहर से दवा खरीदेगा, तो फिर अस्पताल खोलने का क्या मतलब?
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मैंने तुरंत अपने परिचित को फोन किया, जिसके बाद बकावंड बीएमओ द्वारा स्टाफ को निर्देश दिए गए। तब जाकर आनन-फानन में टिटनेस का इंजेक्शन बाहर से मंगाकर लगाया गया। यानी बिना फोन और दबाव के शायद इलाज भी नहीं मिलता।

यह बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है कि जिस इमरजेंसी वार्ड में जीवन बचाने की जिम्मेदारी होती है, वहीं मरीजों को दवा के लिए भटकाया जा रहा है। अगर हालत ज्यादा गंभीर होती तो जान भी जा सकती थी। इस लापरवाही की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था आम जनता के साथ खिलवाड़ है। क्या ये अस्पताल सिर्फ दिखावे और कागजी खानापूर्ति के लिए चल रहे हैं?
प्रशासन को चाहिए कि पूरे मामले की तत्काल जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज को ऐसी लापरवाही का सामना न करना पड़े।
