*-अर्जुन झा-*
*जगदलपुर।* राजनीति ऎसी बुरी शै है कि इसके चक्कर में इंसान किसी भी हद तक जा सकता है। कांग्रेस में कुछ ऐसे ही लोग हैं, जो सत्ता और सिंहासन दोनों के लिए दीमक साबित हुए हैं। अब यही दीमक संगठन को चट करने की जुगत में हैं। पार्टी की सत्ता रहते इन मौकापरस्त लोगों ने जमकर मलाई छानी, ऐसे ऐसे कारनामे कर डाले की सरकार की थू थू होने लगी।परिणाम यह हुआ कि सरकार हाथ से फिसल गई। अब यही नेता संगठन पर कब्जा जमाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। अगर ऐसे लोगों की मंशा फलीभूत हो गई तो छत्तीसगढ़ में कांग्रेस संगठन का भी बेड़ागर्क होने से कोई नहीं बचा सकता।
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी इन दिनों संगठनात्मक गतिविधियों पर ज्यादा फोकस कर रही है।कांग्रेस जल्द ही अपने जिला अध्यक्षों की घोषणा करने वाली है। इसी तारतम्य में प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट भी कल छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। एसआईआर की प्रक्रिया पर भी पार्टी अपना रुख जल्दी ही सामने लाएगी। मौजूदा हालात में पार्टी अभी संगठन की मजबूती और जिम्मेदार, ईमानदार तथा ऊर्जावान लोगों को संगठन में दायित्व सौंपने को लेकर पूरी संजीदगी से काम कर रही है। चुनावों में मिली प्रत्याशित अप्रत्याशित हार के बाद कांग्रेस पार्टी अपने संगठनात्मक ढांचे को और भी मजबूत कर अगले चुनाव की तैयारी में जुट जाने प्रयासरत है। ऐसे हालातों के बीच जो खबरें सामने आ रही हैं, वह कांग्रेस के लिए शुभ संकेत देती प्रतीत नहीं होतीं। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के अनुसार पार्टी ने नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति हेतु जो फार्मूला अपनाया था उसके अनुसार संगठन में लगातार कार्य कर रहे कार्यकर्ता ने अपनी दावेदारी इस पद हेतु प्रस्तुत की थी, किंतु अब मिल रही जानकारी के अनुसार पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक के साथ वर्तमान विधायक भी अब इस पद को पाने अपनी दावेदारी आलाकमान के पास रख चुके हैं। उनका तर्क यह है कि चूंकि हम प्रशासनिक मामलों और संगठन के वे बेहतर जानकार हैं अतः उन्हें इस पद हेतु मौका दिया जाए। अब इस जानकारी के सामने आने से आलाकमान पशोपेश में है कि अब क्या करें और क्या न करें। सूत्रों ने यह भी बताया कि कांग्रेस के एक पूर्व मंत्री का गुट इस अभियान को हवा दे रहा है। उनकी मंशा है कि येनकेन प्रकारेण संगठन पर कब्जा कर आगामी चुनाव से पूर्व अपनी स्थिति टिकिट हेतु मजबूत कर ली जाए। कई मामलों में जेल की सजा काट रहे पूर्व मंत्री, विधायक के वर्तमान चाटुकार भी पीसीसी अध्यक्ष पद और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर कब्जा जमाने की फिराक में हैं। इसके पीछे उनकी मंशा और स्वार्थ निहित है आगामी चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करना। ये लोग लगातार इस प्रयास में हैं कि सत्ता में अगर पार्टी लौटती है तो उसमें उनकी ही भागीदारी रहे, वरना सत्ता से पार्टी की स्थिति को डांवाडोल किया जाए। यह तभी संभव हो पाएगा, जब संगठन में उनका कब्जा रहेगा। अतः इन लोगों द्वारा अचानक जिला अध्यक्ष पद की दावेदारी सामने आने से इनकी मंशा साफ झलकती है। इन्हीं लोगों की करगुजारियों के कारण कांग्रेस को छत्तीसगढ़ की सत्ता से बेदखल होना पड़ा है। अब अगर ऐसे ही लोग संगठन में काबिज हो जाएंगे, तो फिर कांग्रेस के लिए सत्ता में लौटने का सपना देखना भी बेमानी होगा।
