———-अर्जुन झा ——–
जगदलपुर। प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ के प्रांतीय निर्देशानुसार 1998–99 एल.वी. संवर्ग के शिक्षकों ने अपनी एकमात्र मांग पुरानी पेंशन सहित समस्त सकल लाभ बहाल करने को लेकर आज आयुक्त बस्तर संभाग के नाम ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन, वित्त सचिव एवं शिक्षा सचिव के नाम संबोधित था।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजकिशोर तिवारी, प्रदेश महासचिव डेसनाथ पांडे तथा संभागीय अध्यक्ष अमलेस ठाकुर के नेतृत्व में शिक्षक प्रतिनिधियों ने कहा कि 1998–99 में प्राथमिक स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 1-179/94/20-1, दिनांक 24 जनवरी 1998
तथा 1621/एस.एस.ई/94, दिनांक 30 जुलाई 1994 के आधार पर उन्हें नियमित, पेंशन योग्य पद पर नियुक्त किया गया था।
इसी के साथ मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल के आदेश क्रमांक 889/885/99, दिनांक 14.05.1999 द्वारा पेंशन उपादान योजना लागू करने हेतु विभाग को निर्देशित किया गया था।
“नियमित नियुक्ति पेंशन योग्य होने के बावजूद सकल लाभ से वंचित” शिक्षक संघ संघ ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि छत्तीसगढ़ गठन के बाद वर्ष 2001 में उनका नियतीकरण पंचायत विभाग में किया गया, जबकि उसी वर्ष मध्यप्रदेश के आदेश क्रमांक 1284/13/2001, दिनांक 27.04.2001 के अनुसार पंचायतों के स्कूलों को पुनः शिक्षा विभाग में सम्मिलित किया गया था।
शिक्षकों ने पूछा कि “जब अन्य सभी कर्मचारियों को नियुक्ति तिथि से सेवा-गणना कर पुरानी पेंशन दी गई, तो सिर्फ 1998–99 एल.वी. संवर्ग को ही क्यों वंचित रखा गया” संघ ने यह भी कहा कि सविंधान के अनुच्छेद 14 (समता का अधिकार) का उल्लंघन हुआ है तथा शिक्षकों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया गया है। 2004 के पूर्व नियुक्ति—पुरानी पेंशन का स्पष्ट प्रावधान ज्ञापन में बताया गया कि भारत सरकार की पेंशन व्यवस्था (सिविल सेवा नियम 1972) के अनुसार 2004 के पूर्व नियुक्त सभी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन अनिवार्य रूप से देय थी,
भले ही उनका नियमितीकरण 2004 के बाद क्यों न हुआ हो।
लेकिन 1998–99 संवर्ग के शिक्षकों के मामले में नियुक्ति-तिथि से सेवा-गणना नहीं की गई और 2018 को नियमित नियुक्ति माना गया, जिससे वे आज भी पेंशन सहित अन्य सकल लाभों से वंचित हैं।
सेवानिवृत्त शिक्षकों की दयनीय स्थिति है। संघ ने कहा कि 1998–99 बैच के कई सेवानिवृत्त शिक्षक आर्थिक रूप से अत्यंत कठिन परिस्थिति में हैं। यदि शासन ने तत्काल निर्णय नहीं लिया, तो हमें आर-पार की लड़ाई लड़ने बाध्य होना पड़ेगा।
ज्ञापन सौंपने चन्द्रभूषण ठाकुर, मीरा ठाकुर, माया वैद्य, कृष्णा बघेल, संगीता गोस्वामी, केशव मंडन, हरेंद्र सिंह ठाकुर, मसूराम मंडावी, कुशनुराम बघेल, खागेस्वर नाग, रेखा देवी पासवान, मालती बघेल, गायत्री साहू, प्रमोदनी ध्रुव, परशुराम ठाकुर, सोमारू बघेल, तुलसीराम साहू, सावित्री पोयाम, वृंदा ध्रुव, माया सिंह, आशानिधि आनंद, सोनसिंह पटेल, संतोष बीसाई, अशोक विसाई, महादेव सेठिया, पीलूराम भारद्वाज, जोड़ियाराम बघेल, थिबुराम बघेल, समलूराम कश्यप, मौसू राम मंडावी, देव नारायण साहू सहित अनेक शिक्षक मौजूद थे।
