**रायपुर।** रविवार सुबह छत्तीसगढ़ में एसीबी–ईओडब्ल्यू की टीम ने बड़ी कार्रवाई शुरू की। आबकारी विभाग और डीएमएफ से संबंधित मामलों की जांच के तहत प्रदेशभर में लगभग 18 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई। राजधानी रायपुर में रामा ग्रीन कॉलोनी स्थित पूर्व आबकारी आयुक्त **निरंजन दास** के आवास पर टीम ने दस्तावेजों की जांच की। इसी तरह अमलीडीह की **ला विस्टा कॉलोनी** में कारोबारी **हरपाल अरोरा** के घर भी सर्च अभियान चलाया गया।
**बिलासपुर में** शराब कारोबार से जुड़े विवादों में चर्चा में आए **अनिल टुटेजा** के रिश्तेदार **अशोक टुटेजा** के ठिकानों की तलाशी ली गई।
**कोंडागांव में** वर्ष 2019-20 के दौरान डीएमएफ सप्लाई से जुड़े **कोणार्क जैन** के आवास पर कार्रवाई की गई।
**जगदलपुर में** निरंजन दास के भाई **चितरंजन दास** के मैत्री संघ स्थित घर की जांच की गई।
टीमें विभिन्न स्थानों से फाइलें, लेन-देन से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सभी ठिकाने उन व्यक्तियों से जुड़े बताए जा रहे हैं जिनपर आर्थिक अनियमितताओं और लाभ पहुंचाने के आरोप हैं।
**क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला?**
शराब घोटाला वह मामला है जिसमें पूर्व सरकार के दौरान बड़े पैमाने पर शराब कारोबार से जुड़े राजस्व, टेंडर, वितरण और सप्लाई सिस्टम में गड़बड़ियों के आरोप सामने आए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार—
✅ अवैध व अतिरिक्त वसूली के आरोप
✅ शराब बिक्री से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के दावे
✅ सप्लाई में पक्षपात और अनियमित टेंडर प्रक्रिया
✅कथित रूप से अफसरों, कारोबारियों और नेटवर्क की मिलीभगत
इस मामले में कहा गया कि सरकारी प्रणाली के माध्यम से होने वाली शराब बिक्री से प्राप्त होने वाली राशि को गलत तरीके से मोड़ा गया और इसका लाभ चुनिंदा व्यक्तियों तक पहुंचाया गया। इसी सिलसिले में कई अधिकारियों, कारोबारियों और उनसे जुड़े रिश्तेदारों व सहयोगियों की जांच जारी है।
एसीबी–ईओडब्ल्यू की ताजा कार्रवाई को इसी बड़े आर्थिक अनियमितता प्रकरण की आगे बढ़ती कड़ी माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार जब्ती और दस्तावेज़ीय जांच के बाद आगे की कानूनी प्रक्रियाएँ तय की जाएंगी।
