*-अर्जुन झा-*
*जगदलपुर।* सुकमा जिले के कोंटा से पूर्व विधायक और आदिवासी नेता मनीष कुंजाम ने माड़वी हिड़मा के एनकाउंटर को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि माड़वी हिड़मा को मरवाने में नक्सली नेता देवजी की साजिश है।
मनीष कुंजाम ने कहा कि 18 नवंबर को आंध्रप्रदेश के मारेडूमिली घाटी में पुलिस द्वारा माड़वी हिड़मा समेत छह लोगों को मारे जाने की खबर पूरी तरह से झूठी और फर्जी है। उन्होंने कहा कि हिड़मा को पकड़कर कहीं और मार डाला गया और फर्जी मुठभेड़ स्थल पर लाशें रख दी गईं। उस स्थान पर मीडिया को जाने से रोका गया। मुठभेड़ के दूसरे दिन आंध्र पुलिस ने 50 से अधिक नक्सलियों को गिरफ्तार कर दावा किया गया कि वे सभी बस्तर के रहने वाले हैं, जो एक संदेहास्पद बात है। मनीष कुंजाम ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे शीर्ष नक्सली कमांडर देवजी का षडयंत्र है। देवजी ने बस्तर के नक्सलियों को सरेंडर कराने के बहाने आंध्रप्रदेश बुलाया और हिड़मा समेत कई नक्सलियों को मारवा दिया और गिरफ्तार करवाया। उनका मकसद अपनी राजनीतिक छवि बनाना था। हिड़मा को हर नक्सली घटना का मास्टर माइंड बताया जाता रहा है, जबकि असल में आंध्र और तेलंगाना के नक्सलियों ने बस्तर के आदिवासी युवाओं को उकसाया है। नक्सल घटनाओं के लिए हिड़मा को जिम्मेदार ठहराकर आंध्र के नक्सली अपना बचाव कर रहे हैं। मनीष कुंजाम ने कहा कि देवजी का कहीं गिरफ्तार या सरेंडर होने के दावे किए गए, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ। हिड़मा को साजिश के तहत फंसाकर फर्जी मुठभेड़ में मारा गया और बाद में देवजी खुद लापता हो गया। यदि हिड़मा ने सरेंडर किया होता, तो आंध्र एवं तेलंगाना के नक्सली नेताओं के राज़ सामने आ जाते। उन्होंने ताड़मेटला नक्सली हमले का भी जिक्र किया, जहां हिड़मा को मास्टरमाइंड बताया जाता है, जबकि उसी समय रमन्ना ज़ोनल कमेटी का सेक्रेटरी था। आईपीएस अधिकारी एसआरपी कल्लूरी ने स्थानीय और आंध्र के नक्सलियों के बीच फासले को हवा दी जिसके बाद ही हिड़मा को जोनल कमेटी में शामिल किया गया ताकि संगठन में स्थानीय आदिवासियों को तवज्जो दी जा सके। चूंकि कई नक्सली घटनाओं में स्थानीय युवाओं को फंसाया जा रहा है, असली मास्टरमाइंड आंध्र और तेलंगाना के नक्सली नेता हैं। मनीष कुंजाम ने स्थानीय आदिवासी युवाओं से अपील की है कि वे जल्द मुख्यधारा में लौटकर सरेंडर करें। उन्होंने कहा कि आंध्र या तेलंगाना जाने की जरूरत नहीं, वे सुकमा में ही पुलिस से बात कर बेहतर जीवन पा सकते हैं। उन्होंने बड़े नक्सली नेताओं बारसे देवा, ऐर्रा से भी अपील की है कि वे भी मुख्यधारा में लौटें।
