0 आत्म समर्पित नक्सलियों के कैफे का उद्घाटन किया मुख्यमंत्री साय ने 0 पूर्व नक्सलियों का हुनर देख अभिभूत हुए सीएम
0 पंडुम कैफे का शुभारंभ बस्तर में नक्सल उन्मूलन की दिशा में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन का प्रेरक प्रतीक – मुख्यमंत्री साय
= अर्जुन झा =
जगदलपुर, 17 नवंबर । जो हाथ कभी बम और बारूद से खेला करते थे, जमकर कहर ढाया करते थे, वो हाथ अब सृजनशील हो चुके हैं, अपना खास हुनर दिखा रहे हैं। इन हाथों का हुनर देख आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, वन मंत्री केदार कश्यप और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव अभिभूत हो उठे। दरअसल ये हाथ बम बारूद छोड़ चुके हैं और आज इन्हीं हाथों ने मुख्यमंत्री व मंत्रियों को गरमा गरम बड़े और अन्य पकवान परोसे। उनकी सर्विस और बातचीत की शैली ने मुख्यमंत्री को बेहद प्रभावित किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर में सामाजिक, आर्थिक बदलाव के नए अध्याय की शुरुआत करते हुए आज जगदलपुर में पंडुम कैफे का शुभारंभ किया। यह कैफे नक्सली हिंसा के पीडि़तों और समर्पण कर चुके नक्सली सदस्यों के पुनर्वास हेतु छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों को सम्मानजनक और स्थायी आजीविका प्रदान करने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है। यह अनूठी पहल संघर्ष से सहयोग तक के प्रेरणादायक सफर को दर्शाती है। पंडुम कैफे जगदलपुर पुलिस लाइन परिसर में स्थित है। मुख्यमंत्री साय ने पंडुम कैफे में कार्यरत नारायणपुर की फगनी, सुकमा की पुष्पा ठाकुर, बीरेंद्र ठाकुर, बस्तर की आशमती और प्रेमिला बघेल के साथ सौहार्दपूर्ण बातचीत की। उन्होंने नई शुरुआत के लिए उनका हौसला बढ़ाया और पंडुम कैफे के बेहतर संचालन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पंडुम कैफे का शुभारंभ बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन का एक प्रेरक प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने साय ने कहा कि पंडुम कैफे आशा, प्रगति और शांति का उज्ज्वल प्रतीक है। कैफे में कार्यरत युवा, जो नक्सली हिंसा के पीडि़त तथा हिंसा का मार्ग छोड़ चुके सदस्य हैं, अब शांति के पथ पर अग्रसर हो चुके हैं। जिला प्रशासन और पुलिस के सहयोग से उन्हें आतिथ्य सेवाओं, कैफे प्रबंधन, ग्राहक सेवा, स्वच्छता मानकों, खाद्य सुरक्षा और उद्यमिता कौशल का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
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भावुक हो उठे पूर्व नक्सली
हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति की राह पर अग्रसर हो चुकी पर और कैफे में कार्यरत एक महिला ने इस अवसर पर भावुक होकर इस पुनर्वास पहल से हुए बदलाव की बात दोहराई। एक पूर्व माओवादी कैडर ने कहा कि हमने अपने अतीत में अंधेरा देखा था। आज हमें समाज की सेवा करने का यह अवसर मिला है, यह हमारे लिए एक नया जन्म है। बारूद की जगह कॉफी परोसना और अपनी मेहनत की कमाई से जीना, यह अहसास हमें शांति और सम्मान दे रहा है। एक अन्य सहयोगी ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि पहले हम अपने परिवार को सम्मानजनक जीवन देने का सपना भी नहीं देख सकते थे। अब हम अपनी मेहनत से कमाए पैसों से घर के सदस्यों का भविष्य संवार सकते हैं। यह सब प्रशासन और इस कैफ़े की वजह से संभव हुआ है। एक अन्य सदस्य ने समुदाय के सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि हमें लगा था कि मुख्यधारा में लौटना आसान नहीं होगा, लेकिन पुलिस और जिला प्रशासन ने हमें प्रशिक्षण दिया और हमारा विश्वास जीता। सबसे बड़ी बात यह है कि हम अब पीडि़तों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे हमें अपने अतीत के अपराधों को सुधारने और शांति स्थापित करने का अवसर मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि ‘पंडुमÓ बस्तर की सांस्कृतिक जड़ों को दर्शाता है, और इसकी टैगलाइन “जहां पर कप एक कहानी कहता है” इस बात का प्रतीक है कि यहां परोसी गई कॉफी सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष पर विजय और एक नई शुरुआत की कहानी भी अपने साथ लेकर आती है।इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, सांसद महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, बेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, जगदलपुर महापौर संजय पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, संभागायुक्त डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी., कलेक्टर हरिस एस., पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित थे।
