जगदलपुर, 15 नवंबर । बस्तर की समृद्ध जनजातीय परंपराओं का आकर्षण सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी महसूस किया जाता है। इसी का उदाहरण रविवार को तब देखने को मिला जब बस्तर भ्रमण पर आई एक विदेशी महिला पर्यटक यहां की संस्कृति से इतनी प्रभावित हुई कि जनजाति गौरव दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में वह बस्तर की पारंपरिक पोशाक पहनकर पहुँच गई।
महिला ने स्थानीय अंदाज में तैयार होकर हाथों में पारंपरिक वाद्य यंत्र ‘कुहकी’ भी थाम रखा था। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने उसे देखकर आश्चर्य और प्रशंसा दोनों व्यक्त किए। यह दृश्य बताता है कि बस्तर की सांस्कृतिक पहचान कितनी प्रभावशाली और विश्वस्तरीय है।
यह तस्वीर और घटना एक बार फिर साबित करती है कि बस्तर की संस्कृति केवल स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक आकर्षण का केंद्र है।
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