गोमा, 1 फरवरी।( दुर्ग भिलाई अपडेट)
पूर्वी कांगो के उत्तरी किवू प्रांत स्थित रुबाया कोल्टन खनन क्षेत्र में भारी बारिश के बाद हुए भीषण भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी। अवैध और छोटे पैमाने पर संचालित कई खदानों के ढह जाने से सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए हैं। इस हादसे में अब तक कम से कम 200 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि मलबे में अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
एम23 विद्रोही समूह द्वारा नियुक्त गवर्नर के प्रवक्ता लुमुम्बा कंबेरे मुयिसा ने बताया कि राहत और बचाव कार्य बेहद कठिन परिस्थितियों में चल रहा है। कीचड़ और मलबे के नीचे फंसे कई शवों को अब तक बाहर नहीं निकाला जा सका है, जिससे मृतकों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। हादसे में खनन मजदूरों के साथ-साथ आसपास के इलाकों में रहने वाले बच्चे और बाजार में काम करने वाली महिलाएं भी चपेट में आ गईं।
घायलों का गोमा में इलाज, कई की हालत नाजुक
भूस्खलन में करीब 20 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में जारी है। अधिकारियों के अनुसार, गंभीर घायलों को शनिवार को एंबुलेंस के माध्यम से गोमा शहर के बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि मृतकों की संख्या 227 तक पहुंच सकती है।
एम23 के नियंत्रण में है खनन इलाका
रुबाया क्षेत्र की कोल्टन खदानें अप्रैल 2024 से एम23 विद्रोही समूह के कब्जे में हैं। यह इलाका वैश्विक स्तर पर काफी अहम माना जाता है, क्योंकि यहां से दुनिया के लगभग 15 प्रतिशत कोल्टन का उत्पादन होता है। कोल्टन से प्राप्त टैंटलम का उपयोग स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और आधुनिक तकनीकों के निर्माण में किया जाता है।
यहां खनन कार्य मुख्य रूप से छोटे पैमाने पर होता है, जहां मजदूर बिना पर्याप्त सुरक्षा के हाथों से खुदाई करते हैं। कम मजदूरी और सुरक्षा उपायों की कमी के चलते ऐसे हादसे अक्सर जानलेवा साबित होते हैं।
खनन पर अस्थायी प्रतिबंध, लोगों को हटाने के निर्देश
हादसे के बाद एम23 द्वारा नियुक्त गवर्नर ने रुबाया क्षेत्र में छोटे पैमाने के खनन कार्य पर अस्थायी रोक लगाने के आदेश दिए हैं। साथ ही खदानों के आसपास झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
गौरतलब है कि पूर्वी कांगो लंबे समय से हिंसा, अस्थिरता और मानवीय संकट का सामना कर रहा है। सरकारी बलों, रवांडा समर्थित एम23 विद्रोहियों और अन्य सशस्त्र समूहों के बीच जारी संघर्ष ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। यह हादसा एक बार फिर खनन मजदूरों की उपेक्षित सुरक्षा व्यवस्था और क्षेत्र में व्याप्त असुरक्षा को उजागर करता है।
