बिलासपुर, 29 जनवरी 2026 (दुर्ग भिलाई अपडेट)
शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्तियों को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने विभागीय अफसरों पर नियमों की अनदेखी और संगठित भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कमिश्नर को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
नियमों के खिलाफ एक ही परिवार से दो नियुक्तियों का आरोप
शिकायत में बताया गया है कि शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के स्पष्ट नियमों के बावजूद एक ही परिवार के दो सदस्यों को नियुक्ति दी गई। मृत कर्मचारी की पहली पत्नी की संतान को अनुकंपा नियुक्ति देने के बाद, दूसरी पत्नी की संतान को भी नौकरी दे दी गई, जबकि नियमानुसार एक परिवार से केवल एक ही अनुकंपा नियुक्ति मान्य होती है। इसे नियमों की खुली अवहेलना बताया जा रहा है।
जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका पर उठे सवाल
अंकित गौरहा ने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में लिपिक सुनील यादव के साथ-साथ तत्कालीन और वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे की भूमिका भी संदिग्ध है। आरोप है कि विभागीय स्तर पर लेन-देन के बाद नियुक्तियों और पदोन्नतियों को अंजाम दिया गया।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब आरोप जिला शिक्षा कार्यालय से जुड़े हैं, तब उसी कार्यालय के अधीन खंड शिक्षा अधिकारियों से जांच कराना निष्पक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ है।
पदोन्नतियों और संलग्नीकरण में भी गड़बड़ियों का दावा
शिकायत में वर्ष 2021-22 के दौरान नियमों के विपरीत पदोन्नतियों का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि बिना स्पष्ट पात्रता और स्वीकृत पदों के कर्मचारियों को सहायक ग्रेड-03 से ग्रेड-02 में पदोन्नत कर वर्षों तक वेतन आहरण कराया गया।
इसके साथ ही कार्यालयों में जरूरत से ज्यादा कर्मचारियों का संलग्नीकरण कर स्कूलों में शिक्षकों और स्टाफ की भारी कमी को नजरअंदाज किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
अवैध वसूली के गंभीर आरोप
प्रेस नोट में यह भी आरोप लगाया गया है कि पदस्थापन, संलग्नीकरण और पदोन्नति के बदले कर्मचारियों से मासिक अवैध वसूली की जाती रही। आरोपों के अनुसार शिक्षकों से 10 हजार रुपये, बाबुओं से 5 हजार रुपये और चपरासियों से 2 हजार रुपये प्रतिमाह वसूले जाते थे।
राज्य स्तर तक ले जाने की चेतावनी
अंकित गौरहा ने स्पष्ट किया है कि यदि इस मामले में स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई गई तो वे इसे राज्य स्तर तक ले जाएंगे और जरूरत पड़ी तो आंदोलन व धरना भी किया जाएगा।
उनका कहना है कि यह मामला केवल अनुकंपा नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा विभाग में वर्षों से जमे भ्रष्ट तंत्र की ओर इशारा करता है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर किस स्तर की जांच कराता है और क्या शिक्षा विभाग में कथित अनियमितताओं पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।
