नई दिल्ली, 02 मार्च। अमेरिका और इज़रायल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत की खबरों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है और रणनीतिक Strait of Hormuz बंद होता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल संभव
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 85–90% आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि इस मार्ग पर आपूर्ति बाधित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100–120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
ऐसी स्थिति में दिल्ली में:
पेट्रोल 95 रुपये से बढ़कर करीब 105 रुपये प्रति लीटर
डीजल 88 रुपये से बढ़कर लगभग 96 रुपये प्रति लीटर
तक पहुंच सकता है। हालांकि अंतिम फैसला कई कारकों पर निर्भर करेगा।
देश में पेट्रोल-डीजल के दाम सरकारी तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले 15 दिनों के औसत कच्चे तेल के भाव और डॉलर-रुपये की स्थिति के आधार पर तय करती हैं। अंतिम कीमत में केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स का बड़ा हिस्सा शामिल होता है, इसलिए सरकार की नीति भी अहम भूमिका निभाएगी।
सोना-चांदी में रिकॉर्ड तेजी की आशंका
युद्ध और अनिश्चितता के माहौल में निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं। कमोडिटी बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि:
सोना 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1.90 लाख रुपये तक जा सकता है।
चांदी 2.67 लाख रुपये प्रति किलो से बढ़कर 3.50 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है।
यदि खाड़ी क्षेत्र में हालात और बिगड़ते हैं तो शेयर बाजार में भी अस्थिरता बढ़ सकती है और निवेशकों का झुकाव सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर और तेज हो सकता है।
भारत के लिए बड़ी चुनौती
ऊर्जा आयात पर भारी निर्भरता के कारण भारत के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रहना बेहद जरूरी है। किसी भी तरह की बाधा से पेट्रोल-डीजल, परिवहन खर्च, महंगाई दर, शेयर बाजार और आम उपभोक्ता की जेब पर व्यापक असर पड़ सकता है।
फिलहाल सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है और वैश्विक बाजार के रुख के अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी।
