नई दिल्ली, 02 मार्च। पाकिस्तान में इंटरनेट सेवाओं को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। आगामी 5जी स्पेक्ट्रम नीलामी से पहले सरकार के कथित ‘फायरवॉल’ सिस्टम को लेकर विरोधाभासी रिपोर्टें सामने आई हैं, जिससे तकनीकी क्षेत्र और आम उपभोक्ताओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में ऐसी खबरें आई थीं कि सरकार अगले महीने प्रस्तावित 5जी स्पेक्ट्रम ऑक्शन से पहले विवादित ‘फायरवॉल’ सिस्टम को बंद कर सकती है। हालांकि, नेशनल असेंबली की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति में अधिकारियों ने इन रिपोर्टों को गलत बताया और स्पष्ट किया कि यह प्रणाली अभी भी लागू है।
अधिकारियों ने बताया कि जिसे आमतौर पर ‘फायरवॉल’ कहा जा रहा है, उसका आधिकारिक नाम वेब मैनेजमेंट सिस्टम (WMS) है। ‘फायरवॉल’ शब्द को उन्होंने केवल आम बोलचाल का नाम बताया। लेकिन आधिकारिक स्पष्टीकरण के बावजूद भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
सीमित स्पेक्ट्रम बना बड़ी चुनौती
पाकिस्तान में मोबाइल सेवाओं के लिए फिलहाल लगभग 270 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम आवंटित है, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों की तुलना में काफी कम है। जहां क्षेत्रीय औसत निम्न और मध्यम बैंड में 700 मेगाहर्ट्ज से अधिक है, वहीं प्रति दस लाख आबादी पर उपलब्ध स्पेक्ट्रम के मामले में भी पाकिस्तान पीछे है।
श्रीलंका: 15.2 मेगाहर्ट्ज
वियतनाम: 7.4 मेगाहर्ट्ज
भारत: 3.9 मेगाहर्ट्ज
बांग्लादेश: 3.6 मेगाहर्ट्ज
इंडोनेशिया: 2.1 मेगाहर्ट्ज
पाकिस्तान: 1.1 मेगाहर्ट्ज
इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सेवा गुणवत्ता और नेक्स्ट-जेनरेशन टेक्नोलॉजी के लिए स्पेक्ट्रम उपलब्धता बढ़ाना बेहद आवश्यक है।
बार-बार आउटेज से व्यवसाय प्रभावित
पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान में इंटरनेट सेवाओं में अचानक रुकावटें देखी गई हैं, जिससे ऐप-बेस्ड कंपनियों और ऑनलाइन सेवा प्रदाताओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। कुछ मामलों में समुद्री केबल को नुकसान जिम्मेदार बताया गया, जबकि कुछ रुकावटों को सरकारी ‘टेस्ट ट्रायल’ की अफवाहों से जोड़ा गया।
हालांकि, कई घटनाओं के पीछे वास्तविक कारणों को लेकर अब तक स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
डिजिटल महत्वाकांक्षा पर असर
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान को क्षेत्रीय टेक हब के रूप में उभरना है, तो स्थिर, तेज और विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करनी होगी। मौजूदा अनिश्चितता ने टेक उद्यमियों और डिजिटल निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
आगामी 5जी स्पेक्ट्रम नीलामी को देश के डिजिटल भविष्य के लिहाज से अहम माना जा रहा है, लेकिन ‘फायरवॉल’ विवाद और इंटरनेट संकट ने इस प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
