*अर्जुन झा*
जगदलपुर। बालाजी मंदिर के रजत जयंती महोत्सव के चौथे दिन महत्वपूर्ण रस्म संपन्न हुए। भीष्म एकादशी के शुभ अवसर पर भगवान का महा अभिषेक और श्रीनिवास कल्याणम की रस्म अदायगी की गई। शाम में प्रतापदेव वार्ड स्थित मद्दी सप्तगिरि एवं दादाबाड़ी के पास स्थित के. आदिनारायण राव के निवास में भगवान की पूजा के बाद वर- वधु पक्ष की भूमिका निभा रहे दोनों परिवारों ने धूमधाम से बारात निकाला। बारात में भक्तिभाव में डूबे श्रद्धालु जमकर नाचे। मंदिर प्रबंधन के अनुसार इस अवसर पर बस्तर अंचल के अलावा रायपुर, दुर्ग, भिलाई, चरौदा, कोरबा, बिलासपुर, चिरमिरी आदि शहरों के साथ साथ आंध्र, ओड़िशा और महाराष्ट्र से भी हजारों श्रद्धालु पहुँचे हुए थे। जिसे देखते हुए मंदिर परिसर में विशेष व्यवस्थाएं की गई थी। देर शाम मंदिर पहुँचने पर श्रीनिवास कल्याणम पूजा प्रारंभ हुआ जो कि रात 12 बजे तक चलता रहा। इस विधान में भगवान श्रीनिवास और माता लक्ष्मी के विवाह का रस्म पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अदा किया गया। पंडितों की उपस्थिति में विवाह के दौरान वर- वधु पक्ष के बीच होने वाले संवाद के साथ भक्तों के समक्ष भगवान का विवाह मंत्रोच्चार के साथ संपन्न किया गया। इससे पूर्व सुबह स्वर्ण कलश की पूजा के दौरान भक्तों के हाथों से विधिवत स्वर्ण कलश में संग्रहित शुद्ध शहद से रेजेटी रामाचार्युलु द्वारा भगवान का अभिषेक किया गया। महा अभिषेक में हज़ारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान बालाजी, माता अंडाल एवं माता पद्मावती का महाअभिषेक किया। सुबह 9 बजे से प्रारंभ हुए विशेष अनुष्ठान में स्वर्ण कलश के साथ- साथ चांदी और लक्ष्मी कलशों से देव प्रतिमाओं का अभिषेक संपन्न किया। आंध्र प्रदेश से आए विद्वान पंडितों की अगुवाई में भगवान बालाजी का पंचगव्य पंचामृत, दूध, दही, इत्र, अष्टगंध सहित विविध सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक किया गया।
ढोल.नगाड़ों और बैंड बाजे के साथ निकली भगवान की भव्य बारात
टेंपल कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि श्रीनिवास कल्याणम विधान में सप्तगिरि मद्दी एवं के आदिनारायण राव परिवार क्रमशः वर और वधू पक्ष की भूमिका में थे। दोनों ही परिवारों की ओर से आमंत्रित अतिथियों ने भगवान की बारात में शामिल होकर ढोल नगाड़े और बैंड बाजे के बीच जमकर नाचे। बारात में दोनों ही पक्षों ने जमकर आतिशबाजी भी की।
