*अर्जुन झा*
*रायपुर।* छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष शंकर साहू ने कहा है कि मध्यान्ह भोजन रसोईया संघ के अनिश्चितकालीन आंदोलन के दौरान हुई दो रसोइया बहनों की मौत प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। यह घटना कई गंभीर सवालों को जन्म देती है।
फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष शंकर साहू ने एक बयान में कहा है कि शासन और संगठन के बीच की मुख्य कड़ी प्रशासनिक अधिकारी होते हैं, पर जब यही अधिकारी लापरवाह और गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाने लग जाएं तो ऐसे भयावाह घटनाक्रम का होना तय रहता है। इसका ताजा उदाहरण दो हड़ताली रसोइया बहनों की मौत है।इस प्रशासनिक लापरवाही की जांच सरकार को करानी चाहिए और जो भी लापरवाह अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार हैं उन्हें दंडित करना चाहिए। शंकर साहू ने कहा है कि दिवंगत रसोईया बहनो के परिवारजनों को सरकार शासकीय नौकरी और 50-50 लाख का मुआवजा प्रदान करे।
शंकर साहू ने कहा है कि आंदोलन के दौरान अगर किसी के साथ कोई घटना या वारदात होती है तो संबंधित को संवैधानिक रूप से उपचार मिलने का अधिकार है। इलाज में हुई देरी एवं शासन-प्रशासन के द्वारा इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया गया, इस कारण दो रसोईया बहनों की मौत हुई है। प्रदेश अध्यक्ष शंकर साहू ने छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय शिक्षक फेडरेशन की ओर से आंदोलन में मृत बहनों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मांग की है कि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो और पीड़ित परिवारों उचित न्याय मिले। श्री साहू ने मध्यान्ह भोजन रसोइया संघ की मांग को जायज बताते हुए कहा है सरकार “मोदी की गारंटी” के तहत इनकी मांगों को अविलंब पूरा कर रसोइयों के साथ न्याय करे।
