इस्लामाबाद, 28 जनवरी।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से मानवाधिकारों को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 13 वर्षीय नाबालिग ईसाई लड़की के अपहरण कर उसे जबरन इस्लाम धर्म अपनाने और मुस्लिम युवक से शादी कराने का आरोप लगाया गया है। इस घटना को लेकर अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है।
प्रमुख मानवाधिकार संगठन वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (VOPM) के अनुसार, साहीवाल जिले की रहने वाली कक्षा छह की छात्रा अचानक लापता हो गई थी। बाद में जानकारी सामने आई कि उसका कथित तौर पर अपहरण किया गया और उसे जबरन धर्मांतरण तथा विवाह के लिए मजबूर किया गया।
संगठन ने बताया कि पीड़िता का परिवार अत्यंत कमजोर सामाजिक-आर्थिक स्थिति में है। लड़की की मां पैर में फ्रैक्चर के कारण चलने-फिरने में असमर्थ हैं, जबकि पिता शारीरिक रूप से विकलांग हैं और अंडे बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बेटी के लापता होने से परिवार पूरी तरह टूट चुका है।
परिवार और स्थानीय समुदाय के अनुसार, कथित आरोपी की पहचान अली हैदर के रूप में हुई है, जो मुस्लिम जट्ट समुदाय से बताया जा रहा है। आरोप है कि लड़की को अगवा करने के बाद उस पर इस्लाम स्वीकार करने और उसी युवक से निकाह करने का दबाव डाला गया।
मानवाधिकार संगठन ने कहा कि यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि बाल अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन है। समुदाय के लोगों ने भी घटना की कड़ी निंदा की है।
VOPM का आरोप है कि घटना को कई दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस द्वारा लड़की की सुरक्षित बरामदगी में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। इसके उलट, परिवार को लगातार धमकियां दी जा रही हैं ताकि वे कानूनी कार्रवाई से पीछे हट जाएं।
संगठन ने कहा कि ऐसी घटनाएं वहां ज्यादा होती हैं, जहां अल्पसंख्यक समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं और अपराधियों को कानून से बच निकलने की उम्मीद होती है।
VOPM ने पाकिस्तानी प्रशासन से मांग की है कि नाबालिग लड़की को तुरंत सुरक्षित बरामद किया जाए, उसके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए और इस पूरे मामले में निष्पक्ष व पारदर्शी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। संगठन ने स्पष्ट किया कि इस मामले को निजी विवाद मानकर दबाना नहीं, बल्कि एक नाबालिग के खिलाफ गंभीर अपराध के रूप में देखा जाना चाहिए।
