नई दिल्ली, 27 जनवरी।
दुनिया भर में बढ़ते युद्ध जैसे हालात, आर्थिक अनिश्चितता और निवेशकों की चिंता का सीधा असर अब सोने-चांदी की कीमतों पर दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना पहली बार 5,000 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया है, जबकि चांदी भी 102 डॉलर प्रति औंस पर पहुंचकर अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है।
दो साल में दोगुने से ज्यादा दाम
जनवरी 2024 में जहां सोना करीब 2,000 डॉलर प्रति औंस था, वहीं अब यह 5,000 डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। यानी महज दो साल में सोने की कीमत दोगुने से भी ज्यादा हो गई है। यह तेजी अचानक नहीं आई है, बल्कि लंबे समय से चल रहे मजबूत कारणों का नतीजा है।
लोगों को सुरक्षित निवेश की जरूरत
जब दुनिया में हालात अस्थिर होते हैं, तब निवेशक अपना पैसा सुरक्षित जगह लगाना चाहते हैं। ऐसे समय में सोना सबसे भरोसेमंद विकल्प माना जाता है। इसी वजह से सोने की मांग तेजी से बढ़ी है।
इसके साथ ही दुनिया के कई केंद्रीय बैंक भी बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहे हैं, जिससे कीमतों को और सहारा मिला है।
चांदी की मांग क्यों बढ़ रही है?
चांदी सिर्फ निवेश तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, बैटरी और मेडिकल उपकरणों में भी होता है। उद्योगों में बढ़ती मांग के कारण चांदी की कीमतों में ज्यादा तेजी देखने को मिल रही है, और इस बार चांदी ने सोने से भी बेहतर प्रदर्शन किया है।
घबराने की नहीं, समझदारी से निवेश की जरूरत
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा तेजी किसी अफवाह या सट्टेबाजी का नतीजा नहीं है। कीमतों में अगर थोड़ी बहुत गिरावट आती भी है, तो वह ज्यादा समय तक नहीं रहेगी। निवेशक इसे खरीदारी का मौका मान सकते हैं।
2026 में भी चमक बरकरार रहने की उम्मीद
जानकारों का मानना है कि 2026 की पहली तिमाही और उसके बाद भी सोने और चांदी की कीमतें मजबूत बनी रह सकती हैं। कम आपूर्ति, लगातार मांग और दुनिया में नकदी की उपलब्धता इन धातुओं को आगे भी सहारा देती रहेगी।
जहां सोना अनिश्चितता के दौर में सुरक्षा का कवच बना रहेगा, वहीं चांदी कमाई के बेहतर मौके दे सकती है।
