*अर्जुन झा*
*जगदलपुर।* छत्तीसगढ़ युवा मंच के संस्थापक नरेंद्र भवानी ने बताया है कि 21 जनवरी को सुबह जमीन विवाद का हवाला देते हुए उक्त 7 लोगों ने 45 साल से काबिज 5 परिवार के लोगों के खेत घर मे घुसकर जबरन कब्ज़ा करने का प्रयास करते हुए जानलेवा हमला तक कर दिया। एक युवक का सिर फोड़ दिया। उसे 12 टांके लगे हैं। एक युवक का गला दबाकर सर पर पत्थरों से वार किया। एक बुजुर्ग का पैर तक तोड़ दिया गया। एक बुजुर्ग महिला के हाथ मे सूजन आते तक मारा गया, दो युवतियों के साथ धक्का मुक्की की गई। भवानी ने आरोप लगाया है कि परपा थाना पुलिस ने बिना कोई कार्रवाई किए हमलावरों को छोड़ दिया। मामले को लेकर 27 जनवरी को कलेक्टर दफ्तर का घेराव करने की चेतावनी दी गई है।
भवानी ने 23 जनवरी को ग्राम करंजी में पीड़ितों से मुलाक़ात कर मामले को समझा। उन्होंने कहा कि बेहद चिंताजनक है। जिम्मेदार अधिकारी क्या ऐसा कर सकते हैं? भवानी ने बताया कि वन भूमि पर 5 परिवारों के लोगों का पिछले 45 सालो से कब्ज़ा है। इन्ही परिवारों पर अतिक्रमण का आरोप लगा कर एक वर्ष पहले वन विभाग द्वारा बिना नोटिस दिए सीधे इनके काबिज के घर पहुंचे और जबरन घर को तोड़ दिया गया था। बाउंड्री वॉल को तोड़ा गया, घर मे रखे सामान को जप्त कर लिया गया। इस मामले में गौर करने वाली बात यह है कि लोकतंत्र मे बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए विभाग के अधिकारी आखिर ऐसी गुंडागर्दी कर कैसे सकते हैं, जबकि मामला यायालय में विचाराधीन है। नरेंद्र भवानी ने मांग की है कि मामले की जांच करा कर दोषी अधिकारी पर जिला प्रशासन कड़ी कार्रवाई करे।
भवानी ने आगे बताया है कि 20 जनवरी को भी उक्त 7 लोग काबिज भूमि पर परिवार के खेत घर में घुसे और एक बाड़ी को आग के हवाले कर दिया था। फिर दूसरे दिन 21 जनवरी को फिर से यही 7 लोग इन पीड़ित परिवार के खेत घर मे घुस कर उनकी जमीन की खोदाई करने लगे।काबिज परिवार के लोगों ने विरोध किया, तो एक बुजुर्ग पैर तोड़ दिया गया, एक युवक का सिर फोड़ दिया गया 12 टाँके लगे, एक युवक का गला दबाकर सर पर पथर से वार किया गया एक और युवक का माथा फोड़ दिया गया 4 टांके लगे हैं, एक एक बुजुर्ग महिला के हाथो पर मारा गया, दो महिलाओं के साथ धक्का मुक्की की गई। पीड़ित परिवार के लोगों ने आत्म रक्षा हेतु उक्त 7 लोगों को खदडने का प्रयास किया कुछ समय बाद यह 7 हमलावर भाग खड़े हुए।भवानी आगे बताया है कि यह मामला थाना परपा पहुंचा तो पुलिस वालों ने पीड़ितों से ही दुर्व्यवहार किया। हमलावरों को उसी दिन थाने से छोड़ दिया गया। हमला करने वाले लोग अपने आप को वन समिति का सदस्य बता रहे हैं।
