भिलाई, 24 जनवरी (दुर्ग भिलाई अपडेट)। सेल-बीएसपी प्रबंधन की निजीकरण नीति के खिलाफ भिलाई नगर विधायक देवेन्द्र यादव के नेतृत्व में 25 जनवरी को इस्पात भवन तक प्रस्तावित पदयात्रा को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। यह पदयात्रा रिटेंशन स्कीम और लायसेस के तहत आवंटित आवासधारियों के साथ निकाली जानी थी।
विधायक यादव के अनुसार, “भिलाई बिकने नहीं देंगे” जन-जागरण अभियान के अंतर्गत सभी वार्डों का भ्रमण अभी पूर्ण नहीं हो सका है। इसी कारण पदयात्रा की तिथि आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। वार्ड स्तरीय दौरा पूरा होने के बाद नई तिथि घोषित कर पदयात्रा आयोजित की जाएगी।
उपवास के बाद हुई थी त्रिपक्षीय चर्चा
जन-जागरण अभियान के तहत विधायक देवेन्द्र यादव ने सिविक सेंटर भिलाई में जनता के सहयोग से पांच दिनों का उपवास किया था। उपवास के पश्चात बीएसपी प्रबंधन और जिला प्रशासन की मौजूदगी में त्रिपक्षीय बैठक हुई। इस बैठक में पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय, सेक्टर-9 को लीज पर न देने, अस्पताल में कार्यरत व सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सुविधाएं यथावत रखने तथा मैत्री बाग को किसी संस्था को न सौंपने पर सहमति बनी थी।
हालांकि, रिटेंशन स्कीम को लेकर प्रबंधन की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विधायक यादव ने 15 दिनों का समय दिया था। निर्धारित अवधि में उत्तर नहीं आने के बाद 14 जनवरी से वार्ड स्तरीय जन-जागरण अभियान की शुरुआत की गई।
कई क्षेत्रों में पूरा हुआ वार्ड दौरा
अब तक टाउनशिप के सेक्टर-2, सेक्टर-3, सेक्टर-4, सेक्टर-6, सेक्टर-7, हुडको, जोन-2 और केएलसी खुर्सीपार क्षेत्रों में रिटेंशन स्कीम एवं लायसेस के तहत आवंटित आवासधारियों से मुलाकात की जा चुकी है। स्थानीय लोगों ने अभियान की सराहना करते हुए आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के सुझाव दिए हैं।
कर्मचारियों व आवासधारियों की प्रमुख मांगें
वार्ड भ्रमण के दौरान कर्मचारियों ने बताया कि भिलाई इस्पात संयंत्र वर्ष 1995 से 2000 की अवधि को छोड़कर कभी घाटे में नहीं रहा और लगातार सेल को मुनाफा देता रहा है। इसके बावजूद कर्मचारियों को न तो लाभांश का लाभ मिला और न ही 39 माह का लंबित एरियर्स भुगतान किया गया।
इसके साथ ही 2014 के बाद हाउस रेंट अलाउंस में संशोधन न होना, आवासों की मरम्मत व रखरखाव की कमी, बैकलेन सफाई की अनदेखी, शुद्ध पेयजल की समस्या, दोहरे आवास के नाम पर विजिलेंस जांच की चेतावनी तथा रिटेंशन की वैकल्पिक व्यवस्था की जानकारी न होने जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से सामने आए।
