*अर्जुन झा*
*दल्ली राजहरा।* नगर में भाजपा की नगर पालिका सरकार बने लगभग 10 महीने बीत चुके हैं, लेकिन शहर की सूरत संवारने के नाम पर अब तक कुछ भी कार्य ही नजर आ रहा है। नगर के नागरिकों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि नगर पालिका की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल सौंदर्यीकरण, सफाई व्यवस्था और नगर की मूलभूत संरचनाओं की देखरेख पूरी तरह उपेक्षित दिखाई दे रही है। नगर के चौक-चौराहों पर न तो रंगारोगन हुआ, न ही सौंदर्यीकरण के कोई नए कार्य शुरू किए गए हैं। कई प्रमुख चौकों पर बिजली बंद पड़ी है, जिससे रात में अंधेरा और असुरक्षा की स्थिति बनी रहती है।
*उद्यानों की स्थित दयनीय*
नगर पालिका द्वारा निर्मित उद्यानों की स्थिति और भी चिंताजनक है। लगभग 25 वर्ष पूर्व नगर पालिका गठन के शुरुआती दौर में कुछ वार्डों में बनाए गए उद्यान आज पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं। इसके बाद किसी भी अध्यक्ष के कार्यकाल में न तो नए उद्यानों का निर्माण हुआ और न ही पुराने उद्यानों की समुचित देखरेख की गई। हालांकि, मरम्मत कार्यों के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के आरोप समय-समय पर लगते रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में उद्यान खंडहर में तब्दील होते नजर आ रहे हैं। वार्ड क्रमांक 8 में स्थित नगर पालिका द्वारा निर्मित पहला और कभी सबसे सुंदर उद्यान आज पूरी तरह बदहाली का शिकार हो चुका है। गार्डन का मेंटेनेन्स किए बिना ही उसका सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। बदसूरत चेहरे पर क्रीम पाउडर लगाने से क्या फायदा?
*बीएसपी प्रबंधन ने खींचे हाथ*
उल्लेखनीय है कि दल्ली राजहरा को पूर्व में विकास और सुव्यवस्था के लिए जाना जाता था। शहर के आसपास स्थित पर्यटन स्थलों को विकसित करने की मांग भी विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा लगातार सरकार के समक्ष रखी जाती रही है। पूर्व वर्षों में राजहरा को सुंदर एवं व्यवस्थित बनाए रखने का कार्य बीएसपी प्रबंधन द्वारा किया जाता था, लेकिन अब बीएसपी प्रबंधन ने इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी से हाथ खींच लिया है। उसका स्पष्ट कहना है कि डीएमएफ की राशि जारी की जा चुकी है और अब नगर की व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी सरकार और नगर पालिका की है।
*मिटती जा रही हैं धरोहरें*
नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहर के सौंदर्यीकरण को लेकर कोई ठोस योजना अब तक सामने नहीं आई है। यदि नगर में सौंदर्यीकरण के नाम पर कुछ दिखाई देता है तो वह केवल राज्य सरकार की योजना के तहत बनाए जा रहे अटल परिसर तक ही सीमित है। पूर्व में निर्मित जैन भवन चौक, श्रमवीर चौक, शहीद वीर नारायण सिंह चौक एवं शहीद शंकर गुहा नियोगी चौक आज देखरेख के अभाव में खंडहर बनते जा रहे हैं, लेकिन नगर पालिका प्रशासन इस ओर आंख मूंदे बैठा है। वर्तमान में नगर में यदि कोई कार्य जोर-शोर से चलता दिखाई दे रहा है तो वह केवल वार्डों में नाली और सीसी सड़क निर्माण तक सीमित है, जिनमें भी लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। कुल मिलाकर, 10 महीने बीत जाने के बावजूद दल्ली राजहरा नगर पालिका की भाजपा सरकार सौंदर्यीकरण के मोर्चे पर पूरी तरह विफल नजर आ रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नगर पालिका कब नींद से जागेगी, सौंदर्यiकरण के कार्यों को दोबारा शुरू करेगी और दल्ली राजहरा को फिर से सुंदर, व्यवस्थित तथा रहने योग्य शहर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी?
