*अर्जुन झा*
*बकावंड।* त्रेता युग में एक माता थी कैकेयी जिन्होंने पुत्र मोह में सौतेले पुत्र मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को वनवास दिला दिया और एक माता थी सुमित्रा जिन्होंने श्रीराम के वन गमन में अपने पुत्र लक्ष्मण जी के भी साथ जाने की मंशा को आत्मसात करते हुए उन्हें श्रीराम के साथ जाने की सहृदय अनुमति दे दी थी। कलियुग में भी एक सुमित्रा है जिन्होंने स्वहित की चिंता न कर पर हित को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है। त्रेता युग की माता सुमित्रा की तरह ही कलियुग की यह सुमित्रा भी लोक कल्याण की दिशा में कदम बढ़ा चुकी हैं। यह सुमित्रा आज अपनी पंचायत में अपने काम काज के माध्यम से राम राज लाने की शानदार पहल कर रही हैं। आप भी कलियुग की इस सुमित्रा की बेमिसाल पहल के बारे में जानिए-

यह कहानी बस्तर जिले के बकावंड अंतर्गत करपावंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत बड़े देवड़ा से सामने आई है। कल तक जो सुमित्रा साधारण सी गृहिणी थी, आज नारी कल्याण और ग्राम विकास की पुरोधा बन गई हैं। सुशासन सरकार में महिलाओं को मिलने वाली सरकारी सहायता और शासन की योजनाओं ने महिलाओं को केवल उनके स्वरोजगार तक ही सीमित नहीं रक्षा है, बल्कि राजनीति और ग्राम सुराज नीति में भी सफलता दिला रही हैं। इसका जीता जगता उदाहरण हैं ग्राम पंचायत बड़े देवड़ा की सरपंच सुमित्रा कश्यप। आम गृहिणी रहते सुमित्रा कश्यप ने अपने कृषक पति सुरेंद्र कश्यप के प्रोत्साहन पर आजीविका मिशन के तहत समूह से जुड़ कर ग्राम सेवा का निर्णय लिया। इस दौरान उन्होंने गांव की महिलाओं को शासन की योजनाओं के तहत स्वावलंबी बनाने और स्व रोजगार की ओर उन्मुख करने का कार्य किया। भाजपा की रीति नीतियों और देशहित की भावना से प्रभावित होकर सुमित्रा कश्यप धीरे धीरे भारतीय जनता पार्टी की ओर आकर्षित होती चली गईं और भाजपा से जुड़ गईं।अपने नेताओं के सहयोग से उन्होंने सरपंच पद तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की। ग्राम पंचायत में बैठ कर सुमित्रा राम राज और काम काज की बातें करती हैं। महिलाओं को स्वालंबी बनाने और शिक्षित करने हेतु लगातार पहल करती हैं। आज जब सनातनियों को क्रिश्चियनिज्म में मंतांतरित करने की मुहिम चल रही है, तो सुमित्रा कश्यप महिलाओं के बीच धर्म के प्रति जागरण फैला रही हैं। उड़ीसा सीमा क्षेत्र से जुड़ी पंचायत की सरपंच बन कर वह विकास के कार्य के साथ महिलाओं के प्रति काफी जागरूक होकर उनके हक हेतु प्रतिबद्ध हैं। सुमित्रा कश्यप खुद तो ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं हैं, बावजूद वे अपनी पंचायत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ मुहिम पर बेहतरीन काम कर रही हैं। उनकी मंशा कि कोई भी बेटी अशिक्षित न रहे। इसके साथ ही सरपंच सुमित्रा कश्यप पंचायत की मुखिया होने का अपना धर्म भी बखूबी निभा रही हैं।
