*अर्जुन झा*(दुर्ग भिलाई अपडेट)
*जगदलपुर।* विदेशी वामपंथी पार्टी और उसकी माओवादी विचारधारा के झंडाबरदार नक्सली इस कदर डर गए हैं कि वे अब हमारा भारत हमारा भारत का राग आलापने लगे हैं।हथियार के दम पर मानव समाज में कोहराम मचाने वाले नक्सली संविधान की दुहाई देने लगे हैं। वे अब पत्र के माध्यम से लोगों के बीच अपनी बात सामने लाने लगे हैं। लगता है शासन के साथ आर पार की लड़ाई में अब नक्सलियों का सब कुछ खत्म हो चला है। बचे हुए नक्सली नेता अपनी व्यक्तिगत पूंजी को समेटने में लगे हैं।
सूत्र बताते हैं कि पूरे दक्षिण बस्तर में माओवादी नक्सली नेताओं की अवैध कमाई को यहां के व्यापारी अपने विभिन्न धंधों में लगा रखे हैं। ऐसे व्यापारियों को अब खुफिया एजेंसी चिन्हित कर रही है। कई बड़े व्यापारी इनसे बचने कांग्रेस और सत्ताधारी बीजेपी नेताओं की शरण में पहुंचने लगे हैं। जबकि यही नक्सली भाजपा मुक्त भारत का सपना देख रहे हैं। 31 मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त बस्तर के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के संकल्प को पूरा करने के लिए इंटेलिजेंस टीम उन व्यापारी और नेताओं की धर पकड़ में जुटेगी जो वर्षों से इन नक्सलियों को पालपोष कर इनसे अपनी राजनीतिक व्यापारिक हित साधते आ रहे थे। सुकमा जिले के एक नेता जो आबकारी घोटाले में जेल में बंद है, उनसे खुफिया पुलिस नक्सल मामले से जुड़े तार ढूंढ रही है। माओ समर्थक एक पार्टी के नेता जो सुकमा जिले में अपना व्यवसाय और प्रभाव नक्सली संगठनों के दम पर चलाते रहे हैं, आजकल अघोषित रूप से नक्सलियों के बड़े पैरोकार बनकर उनके संरक्षण और उनसे जुड़े लोगों के बचाव हेतु बयान जारी करने लगे रहे हैं। एक तरफ जहां केंद्र की भाजपा सरकार और राज्य की साय सरकार 31 मार्च 2026 तक बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में दृढ़ संकल्प के साथ काम कर रहे हैं, पुलिस और सुरक्षा बल लगातार आक्रामक तेवर दिखा रहे हैं। यह लक्ष्य फलीभूत होता भी नजर आ रहा है। वहीं दूसरी ओर नक्सली भाजपा मुक्त भारत का सपना संजोये बैठे हैं। नक्सलियों में मची भागम भाग के बीच एक नक्सली संगठन का पत्र सामने आया है, जिसमें सुकमा की और बीजापुर की दो मुठभेड़ों को फर्जी ठहराते हुए आम लोगों से इसका प्रतिकार करने की अपील की गई है।
*यह लिखा है प्रवक्ता गंगा के पत्र में*
दक्षिण बस्तर डिवीजन कमेटी के प्रवक्ता गंगा द्वारा जारी इस पत्र में सदस्य, कमेटी सदस्य एवं कोंटा एरिया एसी इंचार्ज वेठी मांगू, डिवीजन कमेटी सदस्य पोडियम जोगा, कोंटा एरिया एसी सचिव माईडी हिसरा, और कुछ एरिया कमेटी सदस्यों पर 3 जनवरी को 9 बजे कुरवेलार, ग्रामेर, गुदापाड़ा गांवों के जंगलों में पुलिस, सीआरपीएफ, कोबरा, डीआरजी और अन्य सुरक्षा बलों ने हमला किया। इस हमले में 12 जन साथी शहीद हुए, इसी दिन रात 2 बजे को बारसूर थाना अंतर्गत, गंगालगुड़ा गांव में प्रभारी एरिया कमेटी सदस्य) कामरेड मदकम हिड़मा उर्फ बावा, और कमेटी के एक अन्य कार्यकर्ता को पुलिस बल ने घेर कर हमला करते हुए ढेर किया। जिला पुलिस अधिकारियों ने कहा, नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ हुई और नक्सली ढेर हो गए। लेकिन इस दावे का दक्षिण बस्तर डिवीजन कमेटी खंडन करती है। कोई भी मुठभेड़ नहीं हुई है। आम जनता को संबोधित करते हुए गंगा ने कहा है कि आज हमारे भारत में आरएसएस, भाजपा मनुवादी सरकार जनविरोधी कानून को लागू कर रही है। आज तक जनता आंदोलन चलाकर सरकारों को सत्ता से बाहर करती रही है। आरएसएस, भाजपा मनुवादी देश के समृद्ध और प्राकृतिक संसाधन को विकास के नाम पर कंपनियों को सौंपा रहे हैं। इसके खिलाफ जन आंदोलन उभर रहा है। हम क्रांतिकारी के रूप में लड़ रहे हैं और कुर्बान दे रहे हैं। सरकार जनता को गुमराह कर रही है। हम मनुवादी व्यवस्था को खत्म करने की योजना पर काम कर रहे हैं। हम क्रांतिकारी आंदोलन कर रहे हैं। जब तक गरीब शोषित और शोषक वर्ग है तब तक हम आंदोलन जारी रखेंगे। जनता का मनुवादी व्यवस्था का विरोध करे और क्रांतिकारी मानववादी समाज का समर्थन न करने के लिए आगे आए।
