*अर्जुन झा*
*जगदलपुर।* छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मोदी सरकार द्वारा मनरेगा योजना से महात्मा गांधी जी का नाम हटाने को लेकर कहा है कि मनरेगा कानून में परिवर्तन मोदी सरकार का श्रमिक विरोधी कदम है। यह महात्मा गांधी के आदर्शों पर कुठाराघात है, मजदूरों के अधिकारों को सीमित करने वाला निर्णय है।

दीपक बैज ने कहा कि मोदी सरकार ने तथाकथित सुधार के नाम पर झांसा देकर लोकसभा में एक और बिल पास करके दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी स्कीम मनरेगा को खत्म कर दिया है। यह महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और गरीब भारतीयों से काम का अधिकार छीनने के लिए जान बूझकर की गई कोशिश है। अब तक मनरेगा संविधान के आर्टिकल 21 से मिलने वाले अधिकारों पर आधारित गारंटी थी। नया फ्रेमवर्क ने इसे एक कंडीशनल, केंद्र द्वारा कंट्रोल की जाने वाली स्कीम में बदल दिया है। मनरेगा गांधीजी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और डिसेंट्रलाइज्ड डेवलपमेंट के सपने का जीता-जागता उदाहरण था, लेकिन इस सरकार ने न सिर्फ उनका नाम हटा दिया है, बल्कि 12 करोड़ मनरेगा मजदूरों के अधिकारों को भी बेरहमी से कुचला है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि मनरेगा योजना दो दशक से करोडों ग्रामीण परिवारों के लिए लाइफ लाइन रही है और कोविड-19 महामारी के दौरान आर्थिक सुरक्षा के तौर पर जरूरी साबित हुई थी। अब तक मनरेगा मजदूरों को काम देने का कानून था, श्रमिक अधिकार पूर्वक मांग करते थे जिसे योजना में परिवर्तित कर दिया गया। अब इसे चलाना नहीं चलाना सरकार की मर्जी पर निर्भर होगा।मनरेगा के तहत, सरकारी ऑर्डर से कभी काम नहीं रोका गया। नया सिस्टम हर साल तय टाइम के लिए जबरदस्ती रोजगार बंद करने की इजाजत देता है, जिससे राज्य यह तय कर सकता है कि गरीब कब कमा सकते हैं और कब उन्हें भूखा रहना होगा। एक बार फंड खत्म हो जाने पर, या फसल के मौसम में मजदूरों को महीनों तक रोजगार से दूर रखा जा सकता है। मनरेगा केंद्रीय कानून था। 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार द्वारा भेजी जाती थी। अब केंद्र और राज्य का हिस्सा 60- 40 का हो जाएगा। पहले मैचिग ग्रांट 50 प्रतिशत राशि राज्य जमा करेगी तब केंद्र सरकार राशि जारी करेगी। राज्यों की वित्तीय स्थिति सर्वविदित है।इस बिल से आने वाले समय में मनरेगा स्कीम खत्म हो जाएगी। जैसे ही बजट का बोझ राज्य सरकारों पर पड़ेगा, वैसे ही धीरे-धीरे मनरेगा बंद होने लगेगी। श्री बैज ने कहा कि मोदी सरकार अब राज्यों पर ‘जी राम जी का लगभग 50 हजार करोड का बोझ डालना चाहती है। उन्हें 40 प्रतिशत खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
प्रदेश कांग्रेस प्रमुख दीपक बैज ने कहा कि मनरेगा योजना देश के गरीब से गरीब लोगों के लिए रोजगार का सहारा थी, जो कोरोना जैसे मुश्किल हालातों में भी उनके साथ थी। इसलिए ये बिल गरीब मजदूरों के खिलाफ है। 100 दिन से 125 दिन की मजदूरी वाली बात सिर्फ एक चालाकी है।वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 70 प्रतिशत गांवों में भाजपा की सरकार आने के बाद से अघोषित तौर पर काम नहीं दिया जा रहा है। पिछले 11 सालों में मोदी सरकार बनने के बाद मनरेगा में काम देने का राष्ट्रीय औसत मात्र 38 दिनों का है। मतलब 11 सालों में मोदी सरकार किसी भी साल 100 दिन काम नहीं दे पाई। मनरेगा काम करने का सही अधिकार था। उसे जब एक एडमिनिस्ट्रेटिव मदद में बदला जा रहा है, जो पूरी तरह से केंद्र की मर्जी पर निर्भर है। भाजपा भगवान राम के नाम पर एक बार फिर झूठ बोल रही है। वीबी जी राम जी में जो राम जी बता रहे हैं उसमें कही भी भगवान राम नहीं है। वीबी जी राम जी का फुलफार्म विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण है। श्री बैज ने कहा मनरेगा में पहले हर परिवार को न्यूनतम 100 दिनों के काम की कानूनी गारंटी मिलती थी। हर गांव में काम की कानूनी गारंटी मिलती थी। मजदूर पूरे साल काम की मांग कर सकते थे कानूनी न्यूनतम मजदूरी की गारंटी दी गई थी, ग्राम पंचायत के जरिए अपने ही गांव के विकास के लिए काम मिलता था। काम में मनरेगा मेट और रोजगार सहायकों की मदद मिलती थी, मज़दूरी का 100 प्रतिशत भुगतान केंद्र सरकार करती थी, इसलिए राज्य सरकार बिना किसी चिंता या कठिनाई के आपको काम उपलब्ध कराती थी। श्री बैज ने आगे बताया मोदी सरकार ने अब इसे बदलकर जी राम जी कर दिया है। अब श्रमिकों के पास कोई कानूनी गारंटी नहीं रहेगी। काम केवल मोदी सरकार द्वारा चुने गए गांवों में ही मिलेगा। फसल कटाई के मौसम में काम नहीं मिलेगा। मजदूरी सरकार अपनी मर्जी से तय करेगी।अब कहां और क्या काम करेंगे, यह सरकार तय करेगी। अब किसी मेट या रोजगार सहायक की मदद नहीं मिलेगी। अब राज्य सरकारों को मजदूरी का 40 प्रतिशत हिस्सा खुद देना होगा खर्च बचाने के लिए हो सकता है राज्य मजदूरों को काम ही न दें। इस दौरान प्रभारी शकील रिजवी, शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य, ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रेमशंकर शुक्ला, नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी, पूर्व सभापति कविता साहू, महामंत्री अभिषेक नायडू, महिला कांग्रेस अध्यक्ष, चंपा ठाकुर, व्यापारी प्रकोष्ठ अध्यक्ष राजेंद्र पटवा, युकां अध्यक्ष निकेत राज झा, रविशंकर तिवारी, छबिराम तिवारी, संजय पाणिग्रही, वीरेंद्र परिहार, ललिता राव, कमलेश पाठक, अनुराग महतो, एस नीला, सलीम जाफर अली, शादाब अहमद, रजत जोशी, मोहसिन खान आदि मौजूद रहे*
