ईरान, 10 जनवरी।
ईरान में इस्लामी सरकार के खिलाफ जनआक्रोश तेज होता जा रहा है। सर्वोच्च नेता सैयद अली हुसैनी खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार के विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। बढ़ती महंगाई, कमजोर अर्थव्यवस्था और सुरक्षा बलों की दमनकारी कार्रवाइयों ने हालात को विस्फोटक बना दिया है।
8 जनवरी की रात हालात और बिगड़ने के बाद राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के नेतृत्व वाली सरकार ने देशभर में इंटरनेट सेवाएं और अंतरराष्ट्रीय टेलीफोन कॉल बंद कर दीं। वहीं, न्यायपालिका और सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी जारी की है।
सरकार विरोधी आंदोलन को उस समय नई ऊर्जा मिली जब युवराज रजा पहलवी ने गुरुवार और शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार रात 8 बजे लोगों से सड़कों पर उतरने का आह्वान किया। रजा पहलवी के पिता 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले ईरान छोड़कर चले गए थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात 8 बजते ही तेहरान के कई इलाकों में जोरदार नारे गूंजने लगे। प्रदर्शनकारियों ने “तानाशाह मुर्दाबाद”, “इस्लामी गणराज्य मुर्दाबाद” और “यह आखिरी लड़ाई है, पहलवी वापस लौटेगा” जैसे नारे लगाए।
ईरान के कई शहरों और ग्रामीण कस्बों में विरोध प्रदर्शन गुरुवार को भी जारी रहे। प्रदर्शनकारियों के समर्थन में अनेक बाजार और दुकानें बंद रहीं।
अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी के मुताबिक, हिंसक झड़पों में अब तक कम से कम 42 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,270 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।
