*अर्जुन झा*
*दल्ली राजहरा।* शहर में वर्षों की लंबी प्रतीक्षा और लगातार मांगों के बाद कराए जा रहे सड़क मरम्मत एवं डामरीकरण कार्य अब विकास की उम्मीद नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और लापरवाही का खुला दस्तावेज बनता जा रहा है। लगभग 13 किलोमीटर लंबी सड़कों के सुधार पर 61 लाख 36 हजार 863 रुपये की राशि खर्च की जा रही है, लेकिन काम की मौजूदा स्थिति देखकर शहरवासियों में गहरा आक्रोश है। सड़क निर्माण शुरू हुए अभी ज्यादा समय नहीं हुआ और कई स्थानों पर डामर उखड़ने लगा है, गड्ढे जस के तस नजर आ रहे हैं और अनेक हिस्सों में सड़क को आधा-अधूरा छोड़ दिया गया है। लोगों का साफ कहना है कि जिस तरह का काम किया जा रहा है, वह एक बरसात भी नहीं झेल पाएगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार यह कार्य राजहरा टाउनशिप की मौजूदा सड़कों की रिपेयरिंग, मेंटेनेंस और डामरीकरण से जुड़ा हुआ है, जिसमें आरटी-3 डामर का उपयोग किया जाना है। यह ठेका मेसर्स कैलाश इंटरप्राइजेस भिलाई को दिया गया है, जिसे विभागीय दर से लगभग 26 प्रतिशत कम पर यह कार्य सौंपा गया है। इतनी कम दर पर लिया गया ठेका शुरू से ही संदेह के घेरे में है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब ठेकेदार इतनी कम रेट पर काम ले रहा है तो गुणवत्ता से समझौता होना तय है, जिसका असर अब सड़कों पर साफ दिखाई देने लगा है। शहर के कई हिस्सों में यह देखा गया है कि गड्ढों को सही तरीके से भरे बिना ऊपर से डामर डाल दिया गया है। पुलिस थाना से लेकर निर्मला स्कूल तक के मार्ग पर डब्ल्यूबीएम कार्य के नाम पर की गई खानापूर्ति ने स्थिति को और बदतर बना दिया है। डामर और गिट्टी के मिश्रण में न तो मानक अनुपात का पालन किया जा रहा है और न ही तापमान का ध्यान रखा जा रहा है।आरटी-3 डामर टैंकरों के माध्यम से लाया जा रहा है, लेकिन इसकी मात्रा, उपयोग और गुणवत्ता पर कोई ठोस निगरानी नजर नहीं आती। नतीजा यह है कि डामर की ऊपरी परत समय से पहले ही जवाब देने लगी है। दल्ली राजहरा की जनता का आक्रोश केवल सड़क की खराब हालत तक सीमित नहीं है। लोगों का कहना है कि बीएसपी प्रबंधन ने दशकों से इस शहर से अरबों रुपये की कमाई की है, लेकिन जब कर्मचारियों और शहरवासियों को मूलभूत सुविधाएं देने की बात आती है तो हमेशा उदासीन रवैया अपनाया जाता है। सड़क जैसी बुनियादी जरूरत के लिए लोगों को वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा और जब काम शुरू हुआ तो उसमें भी वही पुरानी कहानी- अनियमितता, लापरवाही और भ्रष्टाचार—सामने आ गई। इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू बीएसपी प्रबंधन की चुप्पी है। ऊपर से लेकर नीचे तक कोई भी अधिकारी इस पर खुलकर जवाब देने को तैयार नहीं है। न गुणवत्ता को लेकर कोई सार्वजनिक निगरानी दिखाई देती है और न ही शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई। इससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि क्या यह सब कुछ पहले से तय था और क्या अधिकारियों की प्राथमिकता शहर और कर्मचारियों की सुविधा नहीं, बल्कि अपनी जेब भरना बन चुकी है।
*भावनाओं से न खेले प्रबंधन: जीत*
हैरानी की बात यह है कि कर्मचारियों के हित की बात करने वाली मजदूर यूनियनें भी इस पूरे मामले में खामोश नजर आ रही हैं। सड़क निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य में हो रही लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार पर यूनियनों की ओर से न तो कोई निरीक्षण की मांग उठी और न ही गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस पहल दिखाई दी। लोगों का कहना है कि शायद तब सबको होश आएगा, जब सड़क पूरी तरह उखड़ जाएगी और फिर से मरम्मत की मांग उठेगी। इस मामले पर जनमुक्ति मोर्चा नेता जीत गुहा ने कहा कि शहर के विकास के लिए जिम्मेदार बीएसपी प्रशासन द्वारा शहरवासियों की भावनाओं का मजाक उड़ाया जा रहा है। कहावत है कि मॉल है महराज का, मिर्जा खेले होली, कुछ ऎसी ही हालत बीएसपी प्रशासन ने बनाकर रखी है। यह भी पहला मौका नहीं है जब राजहरा टाउनशिप में नगर हित के कार्यों में अनियमितता के आरोप लगे हों। इससे पहले भी कई विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और लापरवाही की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन हर बार मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस बार सड़क निर्माण की हालत इतनी खराब है कि भ्रष्टाचार खुद सड़कों पर उतर आया है।
*प्रबंधन का जवाब*
इस संबंध में विभागीय अभियंता राकेश बांधे का कहना है कि कार्य में 20 एमएम सील कोट का अधिकांश हिस्सा शामिल है और अन्य स्थानों पर गड्ढों की मरम्मत की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि जो सड़कें ज्यादा खराब हैं, उन्हें चिन्हित कर सुधार किया जाएगा। हालांकि, जमीनी हकीकत और जनता का अनुभव इन दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। बरसात के पहले ही सड़क उखड़ने लगी है। ऐसे में दल्ली राजहरा की जनता अब सीधे सवाल पूछ रही है कि क्या यह सड़क एक साल भी टिक पाएगी, क्या इस कार्य की कभी निष्पक्ष जांच होगी, या फिर यह भी बीएसपी प्रबंधन के भ्रष्ट और लापरवाह रवैये का एक और उदाहरण बनकर रह जाएगा।
