*अर्जुन झा*
*राजनांदगांव ।*
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अशोक फड़नवीस ने मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान हुई भारी अनियमितताओं को लेकर निर्वाचन आयोग और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं। उन्होंने कहा कि BLO की लापरवाही और मनमानी के कारण हजारों वैध मतदाताओं के नाम बिना उचित सत्यापन के मतदाता सूची से पृथक कर दिए गए हैं, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
श्री फड़नवीस ने आगे कहा कि SIR प्रक्रिया के तहत BLO को मतदाताओं के घर-घर जाकर सत्यापन कर फॉर्म भरने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बावजूद हजारों मतदाताओं के नाम बिना फॉर्म भरे और बिना किसी प्रत्यक्ष सत्यापन के सूची से काट दिए गए। यह अपने आप में गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि कई ऐसे मतदाता हैं जिनके नाम 2003 के SIR में दर्ज थे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें 2026 की मतदाता सूची से हटा दिया गया है। यह न केवल प्रशासनिक विफलता है बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा हनन भी है। श्री फड़नवीस ने चिंता जताते हुए कहा कि कई गंभीर रूप से बीमार, बिस्तर से उठने में असमर्थ वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं को भी नोटिस जारी कर तहसील कार्यालय और पंचायत कार्यालय में उपस्थित होने के लिए बाध्य किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग घर से बाहर निकलने की स्थिति में नहीं हैं उन्हें इस तरह परेशान करना क्या मानवीय और संवेदनशील प्रशासन का उदाहरण है उन्होंने आरोप लगाया कि BLO की गलत कार्यशैली या फिर निर्वाचन आयोग के दबाव में पूरी प्रक्रिया हड़बड़ी में पूरी की गई जिससे व्यापक स्तर पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। यदि स्थानीय निर्वाचन अधिकारी गंभीरता और ईमानदारी से कार्य करते तो आज हजारों लोगों को लाइनों में खड़ा नहीं होना पड़ता। श्री फड़नवीस ने याद दिलाया कि SIR से पहले भी प्रतिवर्ष मतदाता पुनरीक्षण का कार्य होता रहा है। यदि पहले की तरह ईमानदारी से काम किया जाता तो इतनी बड़ी विसंगतियां उत्पन्न नहीं होतीं। उन्होंने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो प्रशासन घुसपैठियों को खोजने के नाम पर अपने ही देशवासियों को संदेह के दायरे में खड़ा कर रहा है। कई लोग जो वर्षों से इस देश के नागरिक हैं आज खुद को बेगाना महसूस कर रहे हैं और उनकी नागरिकता तक खतरे में डाल दी गई है। अशोक फड़नवीस ने निर्वाचन आयोग से मांग की कि जो मतदाता घर से बाहर निकलने में असमर्थ हैं उनके लिए BLO को पुनः घर भेजकर सत्यापन कराया जाए। क्योंकि प्रारंभिक स्तर पर फॉर्म जांचने और एकत्र करने की जिम्मेदारी पूरी तरह BLO की थी और गलती भी वहीं हुई है। उन्होंने कहा कि आम जनता को कम से कम इतनी राहत तो मिलनी ही चाहिए।
