*अर्जुन झा*
*जगदलपुर।* बस्तर संभाग के सुकमा जिले के डब्बामरका गांव का पानी जानलेवा साबित हो रहा है। इस पानी के सेवन से ग्रामीणों में अजीब सी बीमारी फैल रही है और लोग धीरे धीरे मौत के आगोश में समाते जा रहे हैं।
वैसे तो बस्तर संभाग के कई गांवों के भूजल स्त्रोतों में फ्लोराइड की अधिक मात्रा होने की शिकायतें आम हैं, लेकिन अब यहां का पानी अब लोगों की जान का दुश्मन बन गया है। बस्तर संभाग के सुकमा जिले के डब्बामरका गांव में पिछले कई माह से बड़ी अजीब बीमारी फैली हुई है। ग्रामीणों के हाथ पैरों में अचानक सूजन आने लगती है। सूजन इस कदर बढ़ जाती है कि पीड़ित व्यक्ति का चलना फिरना तक मुश्किल हो जाता है और वह बिस्तर पकड़ लेता है, फिर धीरे धीरे वह मौत के आगोश में समा जाता है। डब्बामरका के रहने वाले वेट्टी मुड़ा पिता सुकड़ा की कल दोपहर ऎसी ही बीमारी से मौत हो गई। वह शादीशुदा था और काफी समय से हाथ-पैर में सूजन से परेशान था। गांव में सिर्फ वेट्टी मुड़ा ही नहीं, बल्कि और भी कई लोग इसी तरह की सूजन की बीमारी से जूझ रहे हैं। इस मामले में ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी पीने से ऐसी बीमारी पनप रही है। डब्बामरका समेत अन्य गांवों में भी सैकड़ों लोग इस अजीबो गरीब बीमारी से पीड़ित हैं और मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। बावजूद प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग इस ओर ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जानकारी लेना तो दूर की बात, पानी की जांच भी अब तक नहीं की गई है। इससे लगता है कि सुकमा जिला प्रशासन को मौतों के आंकड़े बढ़ने का इंतजार है। उल्लेखनीय है कि बस्तर जिले के भी कई गांवों के भूजल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने की शिकायत मिलती रहती है। फ्लोराइड युक्त पानी पीने से सैकड़ों युवाओं के दांत झड़ चुके हैं, हड्डियां कमजोर हो चली हैं और वे भरी जवानी में बूढ़े नजर आने लगे हैं।
