रायपुर, 05 जनवरी। रायपुर सेंट्रल जेल में पॉक्सो एक्ट के एक मामले में बंद विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से हड़कंप मच गया है। मृतक की पहचान सुनील महानंद के रूप में हुई है। घटना के बाद परिजनों और समाज के लोगों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार रात सेंट्रल जेल रायपुर के बैरक नंबर-5 में बंद सुनील महानंद की अचानक मौत हो गई। देर रात पुलिस द्वारा परिजनों को इसकी सूचना दी गई। मौत की खबर मिलते ही परिजन और समाज के लोग जेल परिसर के बाहर एकत्र होकर धरने पर बैठ गए और जेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
परिजनों का आरोप है कि सुनील को जेल के भीतर लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था, जिससे वह गहरे तनाव में था। उनका कहना है कि मौत की सूचना भी उन्हें काफी देर से दी गई, वहीं बिना किसी पूर्व जानकारी के शव को मर्चुरी भेज दिया गया, जिससे पूरे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है।
सोमवार को छत्तीसगढ़ उत्कल गाड़ा समाज के पदाधिकारी और समाजजन भी परिजनों के समर्थन में धरना प्रदर्शन में शामिल हुए। समाज के लोगों का दावा है कि सुनील महानंद को झूठे मामले में फंसाया गया था और जेल में उसे बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही थीं।
मृतक की पत्नी ने बताया कि दो दिन पहले हुई मुलाकात के दौरान सुनील ने जेल में हो रही प्रताड़ना की जानकारी दी थी और वह बेहद डरा व परेशान नजर आ रहा था। वहीं, परिजनों और रिश्तेदारों ने भी उसकी मानसिक स्थिति को लेकर पहले से चिंता जताई थी।
प्रदर्शनकारियों ने मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी तथा परिवार को उचित मुआवजा देने की भी मांग की है। उनका कहना है कि जब तक सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और सभी तथ्यों की जांच के बाद ही मौत के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
