*अर्जुन झा*
*जगदलपुर।* वीएसके एप के जरिए बायोमेट्रिक्स ऑनलाइन अटेंडेंस को लेकर शिक्षा विभाग में घमासान मच गया है। शिक्षकों का कहना है कि इस एप के जरिए अटेंडेंस और अन्य जानकारियां भेजने में मोबाइल डेटा पर जो खर्च आएगा उसका वहन वे अपनी जेब से भला क्यों करेंगे। काम सरकारी है, तो इसका खर्चा भी सरकार को देना चाहिए।

संयुक्त प्रधान पाठक कल्याण संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष कमल दास मुरचले ने स्कूल शिक्षा विभाग व उच्च अधिकारियों को साफ साफ दो टुक चेताया है कि शिक्षकों पर वीएसके एप डाउनलोड करने दबाव न बनाया जाए, अन्यथा उग्र आंदोलन किया जाएगा। श्री मरचुरे ने कहा है कि प्रधान पाठक व शिक्षकों के लिए बायोमेट्रिक्स ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य किये जाने को लेकर हमारा कोई विरोध नही है। शिक्षक ही एक ऐसा शासकीय कर्मचारी है जो स्कूल मे उपस्थिति के समय लम्बी घंटी बजाकर दूर दूर तक लोगो को संदेश देते हैं कि स्कूल खुल चुका है। वहीं स्कूल बंद करने के पहले घंटी बजाकर सामान्य जन मानस को सूचित करते हैं कि स्कूल बंद हो रहा है। स्कूल खोलने व बंद करने के समय घंटी बजाकर पूरे गांव को सूचना देने वाले शिक्षकों को बायोमेट्रिक्स ऑनलाइन उपस्थिति से कोई विरोध हो ही नही सकता। विरोध सिर्फ एक ही बात का है और वो है प्रधान पाठकों और शिक्षकों के अपने निजी मोबाईल से वीएसके एप को डाऊनलोड कर अपने निजी खर्च से डेटा चलाकर अपनी व विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने को लेकर है। अगर विभाग को शिक्षकों व विद्यार्थियों की बायोमेट्रिक्स ऑनलाइन उपस्थिति जरूरी लगता है तो प्रत्येक सरकारी स्कूल में ऑनलाइन उपस्थिति हेतु बायोमेट्रिक्स उपस्थिति सिस्टम और वाई फाई लगा देना चाहिए। साथ ही ऑनलाइन उपस्थिति सहित विभिन्न प्रकार के सरकारी कार्य को ऑनलाइन करने हेतु विभागीय आदेश समय – समय पर प्रसारित होते रहते है जो शिक्षकों द्वारा अपने स्वयं के खर्च से अपने स्वयं के निजी मोबाईल से कार्य किया जाता है। ऐसे विभन्न प्रकार के ऑनलाइन कार्यों हेतु शिक्षकों को प्रतिमाह 500 रूपये डेटा भत्ता व प्रत्येक स्कूल में एक मोबाईल अनिवार्य रूप से दिया जाना चाहिए। जिससे विभाग द्वारा निर्देशित किए जाने वाले हर ऑनलाइन कार्य को शिक्षकों को करने मे परेशानी न हो। श्री मरचुरे ने कहा-अभी वर्तमान में देखा जा रहा है कि विभाग द्वारा प्रत्येक कार्य को ऑनलाइन स्वयं के मोबाईल मे करने हेतु जबरदस्ती दबाव बनाया जाता है। इस पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगना चाहिए। शिक्षकों का निजी मोबाईल शिक्षकों का ही रहे बजाय सरकारी मोबाईल न बने। प्रदेश अध्यक्ष कमल दास मुरचले ने पुनः कहा है की समय पर अपनी उपस्थिति देने वाले समस्त शिक्षकों को बायोमेट्रिक्स ऑनलाइन उपस्थिति से कोई विरोध नही है विभाग द्वारा ऑनलाइन उपस्थिति हेतु प्रतिमाह डाटा खर्च एवं बायोमेट्रिक्स उपस्थिति सिस्टम सरकारी स्कूलों में लगवाया जाए। उसके बाद ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य की जाए, वरना उग्र आंदोलन किया जाएगा। श्री मरचुरे ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस प्रकार के आदेशों का वे स्वतः संज्ञान लें। नहीं तो अधिकारियों द्वारा शासन की छवि खराब करने व शासन को क्षति पहुंचाने के मंशा से ऐसे ही अजीबो आदेश निकाले जाते रहेंगे।
