भुवनेश्वर/कंधमाल: ओडिशा के कंधमाल और गंजाम जिलों के सीमावर्ती वन क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने एक बड़े संयुक्त अभियान में प्रतिबंधित संगठन CPI (माओवादी) के शीर्ष नेतृत्व को करारा झटका दिया है। 25 दिसंबर 2025 की सुबह हुई इस मुठभेड़ में संगठन के सेंट्रल कमेटी सदस्य (CCM) और ओडिशा स्टेट कमेटी के प्रभारी गणेश उइके सहित चार माओवादी मारे गए।
खुफिया जानकारी पर आधारित सटीक ऑपरेशन
सुरक्षा बलों को रम्भा वन क्षेत्र में सशस्त्र माओवादी कैडरों की उपस्थिति और उनके पुनर्गठन की सटीक खुफिया सूचना मिली थी। यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से माओवादियों की रसद आपूर्ति और आवाजाही के लिए एक रणनीतिक गलियारा रहा है। इसी सूचना के आधार पर संयुक्त बलों ने घेराबंदी शुरू की। गुरुवार तड़के वन क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों पर सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई।
भारी मात्रा में हथियार और शव बरामद
मुठभेड़ थमने के बाद जब सुरक्षा बलों ने ‘सर्च एवं एरिया डॉमिनेशन’ ऑपरेशन चलाया, तो मौके से दो महिला कैडरों सहित कुल चार माओवादियों के शव बरामद किए गए। सर्च ऑपरेशन के दौरान घटनास्थल से भारी मात्रा में आधुनिक हथियार और गोला-बारूद भी जब्त किया गया है। शेष तीन मृत कैडरों की शिनाख्त की प्रक्रिया ओडिशा पुलिस द्वारा जारी है।

कौन था गणेश उइके?
मारे गए माओवादियों में सबसे प्रमुख पहचान गणेश उइके (69 वर्ष) की हुई है। उसके बारे में मुख्य विवरण निम्नलिखित हैं:
मूल निवासी: पुल्लेमाला गांव, नलगोंडा जिला, तेलंगाना।
उपनाम: उसे रूपा, राजेश तिवारी, चम्रू, पक्का हनुमंतु और सोमारू जैसे कई नामों से जाना जाता था।
संगठनात्मक कद: वह 1988 से सक्रिय था और दंडकारण्य से लेकर ओडिशा तक माओवादी गतिविधियों का मुख्य रणनीतिकार था। उसने वेस्ट बस्तर डिवीजनल कमेटी के सचिव और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सदस्य के रूप में भी कार्य किया।
15 जवानों की शहादत का था जिम्मेदार
गणेश उइके छत्तीसगढ़ के सुकमा और बीजापुर जिलों में 16 से अधिक गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित था। वह 2014 के तहकवाड़ा (सुकमा) हमले का मुख्य सूत्रधार था, जिसमें 15 पुलिस जवान शहीद हुए थे। उसके विरुद्ध हत्या, अपहरण, और पुलिस बलों पर घातक हमलों के अनगिनत मामले दर्ज थे।

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक श्री सुन्दरराज पैट्लिंगम ने इस ऑपरेशन को एक “ऐतिहासिक सफलता” करार दिया। उन्होंने कहा:
”गणेश उइके का मारा जाना ओडिशा स्टेट कमेटी और माओवादी कमान के लिए एक अपूरणीय क्षति है। इससे इलाके में उनकी समन्वय क्षमता पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी। यह सफलता वामपंथी उग्रवाद के विरुद्ध हमारी शून्य-सहिष्णुता की नीति को दर्शाती है।”
आईजी ने शेष माओवादी कैडरों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना ही अब उनके पास एकमात्र विकल्प बचा है।
