छत्तीसगढ़
(भिलाई)
भिलाई स्टील प्लांट के निजीकरण के विरोध में चल रही ‘भिलाई नहीं बिकने देंगे’ मुहिम को लगातार जनसमर्थन मिल रहा है। भिलाई विधायक देवेन्द्र यादव द्वारा शुरू किए गए सत्याग्रह के समर्थन में अब प्रदेश के पूर्व मंत्री, विधायक और विभिन्न सामाजिक संगठन खुलकर सामने आ गए हैं।
भिलाई के सिविक सेंटर स्थित पार्किंग ग्राउंड में पिछले चार दिनों से विधायक देवेन्द्र यादव अनशन पर बैठे हुए हैं। इस आंदोलन को छत्तीसगढ़ सिख पंचायत, भोजपुरी परिषद सहित कई सामाजिक संगठनों का समर्थन प्राप्त हो चुका है। मंगलवार को छत्तीसगढ़ सिख पंचायत के चेयरमैन जसबीर सिंह चहल और भोजपुरी परिषद के प्रभुनाथ बैठा अपने समाज के सदस्यों के साथ धरना स्थल पहुंचे और आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया।
अनशन के चौथे दिन आंदोलन को और मजबूती देते हुए पूर्व मंत्री जगतगुरु रुद्र गुरु, पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा, पूर्व मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी, विधायक कविता प्राण लहरें, कांग्रेस प्रवक्ता शैलेश नितिन त्रिवेदी तथा युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा भी सत्याग्रह में शामिल हुए।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ सिख पंचायत के चेयरमैन जसबीर सिंह चहल ने कहा कि 1955 में स्थापित भिलाई इस्पात संयंत्र को देश के मजदूरों और बुजुर्गों ने अपने खून-पसीने से खड़ा किया है। ऐसे ऐतिहासिक सार्वजनिक उपक्रम का निजीकरण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिख समाज इस आंदोलन के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है।
वहीं भोजपुरी परिषद के प्रभुनाथ बैठा ने कहा कि भिलाई केवल एक शहर नहीं बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका और पहचान है, जिसे बिकने नहीं दिया जाएगा।
युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा ने आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप देने की घोषणा करते हुए कहा कि 24 दिसंबर को पूरे छत्तीसगढ़ में पुतला दहन और कलेक्टोरेट घेराव किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सेल प्रबंधन की नीतियां मजदूरों और कर्मचारियों के हितों के खिलाफ हैं। रिटेंशन स्कीम, सेक्टर-9 अस्पताल, स्कूल, मैत्रीबाग, लीज व्यवस्था और न्यूनतम वेतन जैसे मुद्दों पर प्रबंधन का रवैया निराशाजनक है।
पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि जो लोग भिलाई के भविष्य के लिए अनशन पर बैठे हैं, उनसे संवाद करने के बजाय सरकार और प्रबंधन का हठधर्मी रवैया उनकी मंशा को उजागर करता है। वहीं जगतगुरु रुद्र गुरु ने कहा कि वे देवेन्द्र यादव के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और भिलाईवासियों को भरोसा दिलाते हैं कि भिलाई को बिकने नहीं दिया जाएगा।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, श्रमिक संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और महिलाएं भी उपस्थित रहीं। अलग-अलग क्षेत्रों से महिलाओं के समूहों की भागीदारी ने आंदोलन को और अधिक जनआधारित बना दिया है।
