*अर्जुन झा*
*जगदलपुर।* सरकार द्वारा किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई धान खरीदी व्यवस्था सुकमा जिले के कोंटा ब्लॉक में ध्वस्त और अनियमितताओं का शिकार हो गई है। गोल्लापल्ली, कोंटा और किस्टाराम धान खरीदी केंद्रों में चल रही प्रक्रिया को लेकर किसानों में भारी असंतोष व्याप्त है। सरकार ने प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी की घोषणा की है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रहे हैं। खरीदी केंद्रों में मौखिक रूप से 13 क्विंटल से अधिक धान नहीं लेने के निर्देश दिए जा रहे हैं, जिससे किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
धान खरीदी की रफ्तार भी बेहद धीमी है। किसानों के अनुसार प्रतिदिन लगभग 700 क्विंटल धान की ही खरीदी की जा रही है, जबकि किसानों की संख्या और उपज इससे कहीं अधिक है। टोकन व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त है।आगामी माह की 5 तारीख तक के लक्ष्य के अनुसार टोकन नहीं काटे जा रहे हैं, जिससे किसान अपनी उपज लेकर बार-बार केंद्रों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। कई किसानों का धान खुले में पड़ा है, जिससे धान के खराब होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। पिछले वर्ष से तुलना में स्थिति और भी चिंताजनक नजर आती है। बीते साल इस अवधि के दौरान कोंटा ब्लॉक के प्रत्येक धान खरीदी केंद्र में 8 से 10 हजार क्विंटल तक खरीदी पूरी हो चुकी थी, जबकि इस वर्ष अब तक किसी भी केंद्र में 5 हजार क्विंटल का आंकड़ा भी पार नहीं हुआ है। गोल्लापल्ली और किस्टाराम क्षेत्रों में इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है, जहां धीमी खरीदी और अस्पष्ट निर्देशों के चलते किसानों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।
*हकीकत कुछ और: मौसम मंगम्मा*

जिला पंचायत अध्यक्ष मौसम मंगम्मा ने कहा है कि किसानों से चर्चा के बाद साफ हो गया है कि सरकार की घोषणाएं कागजों तक सीमित रह गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी का वादा किया गया था, लेकिन व्यवहार में मौखिक आदेश देकर 13 क्विंटल से अधिक धान नहीं लिया जा रहा है, जो किसानों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि टोकन व्यवस्था जानबूझकर धीमी की गई है, जिससे किसान मजबूरी में बिचौलियों के पास जाने को विवश हो रहे हैं। मौसम मंगम्मा ने कहा कि किसान खेतों में कड़ी मेहनत करता है, लेकिन जब अपनी उपज बेचने का समय आता है तो प्रशासनिक अव्यवस्था उसकी मेहनत पर पानी फेर देती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाकर पूरी क्षमता के साथ खरीदी शुरू नहीं की गई, तो किसान आंदोलन के लिए मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और जिला प्रशासन की होगी।
*नमी के नाम पर लूट: रामादेवी*

गोल्लापल्ली क्षेत्र की जनपद सदस्य रामादेवी ने धान खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि मरईगुड़ा धान खरीदी पर किसानों के धान में नमी का बहाना बनाकर मनमानी कटौती की जा रही है। उन्होंने बताया कि कई मामलों में 10 क्विंटल धान पर 1 क्विंटल तक काट लिया जा रहा है, जिससे किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। रामादेवी ने आरोप लगाया कि सिर्फ कटौती ही नहीं, बल्कि मरईगुड़ा धान खरीदी केंद्र में किसानों से अतिरिक्त पैसा भी लिया जा रहा है और गरीब व आदिवासी किसान मजबूरी में यह सब सहने को विवश हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की धान खरीदी नीति जमीनी स्तर पर विफल हो चुकी है और यदि जल्द ही इन अनियमितताओं पर रोक नहीं लगी तो किसानों का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
*13 क्विंटल की सीमा नहीं: तहसीलदार*
धान खरीदी को लेकर तहसीलदार गिरीश निम्बालकर ने कहा कि 13 क्विंटल तक ही धान लेने की बात को लेकर उनके पास कोई लिखित आदेश नहीं है और तहसील स्तर से वन प्रबंधन समितियों को ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि 13 क्विंटल से अधिक धान बेचने वाले किसानों के मामलों में एक बार भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। वहीं, प्रतिदिन 700 क्विंटल से अधिक खरीदी नहीं हो पाने की स्थिति और किसानों को हो रही परेशानियों से उच्च व जिला अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
