दुर्ग, 15 नवंबर (आरएनएस)। एक समय अविभाजित मध्यप्रदेश में औद्योगिक पहचान के कारण प्रसिद्ध रहा दुर्ग–भिलाई क्षेत्र आज बिजली वितरण और आधुनिकीकरण का राज्य स्तरीय मॉडल बन चुका है। भिलाई स्टील प्लांट ने जहां शहरों को शुरुआती दौर में बिजली और औद्योगिक विकास दिया, वहीं ग्रामीण इलाकों में लंबे समय तक लो-वोल्टेज, ओवरलोडिंग और बिजली कटौती की बड़ी समस्या बनी रही। खासकर दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिले के किसान खराब बिजली व्यवस्था से सबसे ज्यादा प्रभावित थे।
छत्तीसगढ़ राज्य गठन (2000) के बाद 2025 तक के 25 वर्षों में दुर्ग रीजन की बिजली व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला। सीएसपीडीसीएल द्वारा ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नेटवर्क विस्तार, आधुनिकीकरण और बेहतर सेवा को प्राथमिकता दी गई। आरजीजीवीवाय, डीडीयूजीजेवाय और सौभाग्य जैसी योजनाओं ने दूरस्थ गांवों तक बिजली पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान में दुर्ग–बालोद–बेमेतरा क्षेत्र में घरेलू बिजली कनेक्शन लगभग 100% हो चुके हैं।
**विद्युत ढांचे में 25 वर्षों की ऐतिहासिक वृद्धि**
वर्ष 2000 की तुलना में 2025 तक बिजली वितरण अवसंरचना में अनेक गुना विस्तार दर्ज किया गया—
* **वितरण ट्रांसफार्मर** : 4,787 से बढ़कर 34,367 (7 गुना वृद्धि)
* **33 केवी लाइनें** : 885 किमी से बढ़कर 3,311 किमी (करीब 4 गुना विस्तार)
* **11 केवी लाइनें** : 4,758 किमी से बढ़कर 15,842 किमी
* **33/11 केवी उपकेन्द्र** : 39 से बढ़कर 195
* **EHV उपकेन्द्र** : 3 से बढ़कर 19 (6 गुना वृद्धि)
* **एलटी लाइनें** : 9,460 किमी से बढ़कर 36,715 किमी
* **कृषि पंप कनेक्शन** : 19,615 से बढ़कर 1,21,355 (6 गुना से अधिक)
* **गांवों का विद्युतीकरण** : सभी 1,760 गांव 100% विद्युत सुविधा से जुड़ चुके
उच्चदाब उपभोक्ताओं की संख्या 83 से बढ़कर 660, जबकि निम्नदाब उपभोक्ता 3.55 लाख से बढ़कर लगभग 9.87 लाख हो गए। इससे घरेलू, कृषि और औद्योगिक सभी क्षेत्रों को मजबूत और स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हुई है।
**तकनीकी आधुनिकता की ओर बड़ा कदम**
पिछले एक दशक में दुर्ग रीजन ने तकनीकी उन्नयन को नई दिशा दी है। RDS S योजना के तहत लगाए जा रहे **स्मार्ट मीटर** उपभोक्ताओं को ”मोर बिजली“ ऐप के माध्यम से हर 30 मिनट में रीयल-टाइम बिजली खपत जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। बिलिंग पारदर्शी हुई है और उपभोक्ता अपनी खपत पर नियंत्रण रख पा रहे हैं।
बिल भुगतान, नए कनेक्शन और शिकायत समाधान जैसी लगभग सभी सेवाएं अब पूरी तरह डिजिटल हो चुकी हैं, जिससे उपभोक्ताओं की सुविधा बढ़ी है।
**सौर ऊर्जा की ओर बढ़ते कदम**
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से दुर्ग में रूफटॉप सोलर लगाने की गति तेज हुई है। इससे परंपरागत विद्युत स्रोतों पर निर्भरता कम हो रही है और उपभोक्ता स्वयं ऊर्जा उत्पादक बन रहे हैं।
**दुर्ग का बिजली सफर: औद्योगिक रोशनी से हर घर की रोशनी तक**
भिलाई स्टील प्लांट की औद्योगिक चमक से शुरू हुई ऊर्जा कहानी आज आधुनिक, सक्षम और भविष्य उन्मुख विद्युत नेटवर्क में बदल चुकी है। 25 वर्षों में दुर्ग–बालोद–बेमेतरा क्षेत्र ने जिस तेजी से नेटवर्क विस्तार, भरोसेमंद आपूर्ति और उपभोक्ता सेवाओं में सुधार किया है, वह प्रदेश के लिए एक मिसाल है।
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