*अर्जुन झा*
*रायपुर।* पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित साहित्य उत्सव के तृतीय दिवस लाला जगदलपुरी मंडप’में शब्द और संवेदनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान ‘पत्रकारिता और साहित्य’ विषय पर आयोजित विशेष परिचर्चा के मध्य कवयित्री स्मृति दुबे के नवीन कविता संग्रह ‘करुणप्रकाश’ का विमोचन हुआ। इस गौरवमयी क्षण के साक्षी देश के प्रतिष्ठित बौद्धिक हस्ताक्षर रहे। जिनमें वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक एवं प्रखर स्तंभकार अवधेश कुमार, हरिभूमि समाचार पत्र समूह के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी, वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार गिरीश पंकज, प्रसिद्ध पत्रकार स्मिता मिश्रा एवं वरिष्ठ पत्रकार व विचारक शशांक शर्मा प्रमुख रूप से शामिल थे। इन अतिथियों द्वारा स्मृति दुबे की पुस्तक का लोकार्पण किया गया।
विमोचन के अवसर पर वक्ताओं ने पत्रकारिता की तटस्थता और साहित्य की तरलता के अंतर्संबंधों पर अपने विचार साझा किए। अतिथियों ने ‘करुणप्रकाश’ की कविताओं में निहित मानवीय संवेदनाओं और भाषाई शुद्धता की सराहना करते हुए इसे समकालीन साहित्य की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन उत्कृष्ट संचालिका शुभा मिश्रा ‘कनक’ द्वारा किया गया, जबकि संपूर्ण आयोजन के सूत्रधार विभाष झा रहे।उल्लेखनीय है कि जीव विज्ञान की व्याख्याता स्मृति दुबे न केवल साहित्य के क्षेत्र में निरंतर सृजनरत हैं, बल्कि उन्होंने एम.एड. की प्रावीण्य सूची में विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी शैक्षणिक प्रतिभा का लोहा भी मनवाया है। उनकी इस उपलब्धि पर स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय (सेजेस) अमलेश्वर की प्राचार्य निवेदिता ठाकुर सहित समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं ने हर्ष व्यक्त किया है। प्राचार्य एवं विद्यालय परिवार ने उनकी साहित्यिक लेखनी एवं विशिष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए उन्हें अपनी आत्मीय शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है। साहित्य उत्सव में उपस्थित विद्वतजनों एवं प्रबुद्ध समाज ने भी स्मृति दुबे की इस उपलब्धि की जमकर प्रशंसा की।



