*अर्जुन झा*
*जगदलपुर।* बस्तर संभाग में सार्वजनिक वितरण प्रणाली का बंठाधार हो गया है। गरीबों को उनके हक का राशन नहीं मिल रहा है। पीडीएस दुकान संचालक राशन की कालाबाजारी कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर आपूर्ति विभाग एवं खाद्य विभाग की घोर लापरवाही के चलते कहीं लाखों का राशन सड़ गया है, तो कहीं करोड़ों का चावल खराब हो गया है। संभाग के सुकमा जिले में 35 लाख का राशन सड़ गया है। दंतेवाड़ा जिले में 18 करोड़ का चावल खराब हो गया है। बस्तर जिले में भी कुछ ऐसा ही हाल है।
सरकार दावा करते नहीं थक रही है कि पीडीएस में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन यह दावा सिर्फ बयानबाजी और मंचों तक ही सिमट कर रह गया है। सुकमा जिले की दो पंचायतों के सैकड़ों परिवारों के हिस्से का राशन जिले के चिंतलनार के गोदाम में रखे रखे सड़ गया है। यह राशन 35 लाख से अधिक का था। इस राशन में चावल, शक्कर, गुड़, चना शामिल हैं। लेकिन जिला प्रशासन दो वर्षों में यह जिम्मेदारी तय नहीं कर पाया है कि विभाग के किस अधिकारी के लापरवाही से लाखों का चावल और राशन सड़ा है। सड़े चावल की गुणवत्ता जांच रायपुर के लैब में कराई गई थी। जांच में यह चावल मानव उपयोग के लायक नहीं पाया गया है। अब विभाग इस चावल को नीलाम कराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन खरीदार नहीं मिलने से चावल गोदाम में पड़ा हुआ है। सुकमा में दो कलेक्टर बदले जा चुके हैं फिर भी इस बड़े मामले की जांच तक नहीं हो पाई है। उधर दंतेवाड़ा जिले के गीदम के वेयर हाउस में 18 करोड़ का चावल रख रखाव के अभाव में खराब हो चुका है। वहीं बस्तर जिले में पीडीएस दुकानों में घटिया चावल का वितरण किया जा रहा है। ज्ञातव्य हो कि चिंतलनार गोदाम में राशन सड़ने के मामले को जिला प्रशासन, खाद्य सचिव, प्रभारी मंत्री, विभागीय मंत्री के संज्ञान में भी लाया जा चुका है। इन दो वर्षों में 90 से अधिक बार जिला प्रशासन की समय सीमा साप्ताहिक बैठकें एवं मंत्रियों की समीक्षा बैठकें हो चुकी हैं। किसी ने गरीबों के राशन पर गंभीरता पूर्वक चर्चा नहीं की। जिसका यह परिणाम है कि खाद्य विभाग के अफसरों के हौसले बुलंद हो चले हैं। ये अफसर बड़े अफसरों को गुमराह करने से बाज नहीं आते।
*नहीं मिल रहे खरीददार*
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हाल ही में लगभग 9 लाख से अधिक का चावल चिंतलनार में नष्ट किया जा चुका है। अब 35 लाख के चावल को नष्ट करने की तैयारी है। यह चावल सड़ चुका है जो मानव उपयोग के लायक नहीं है। ऐसे में सड़े चावल को नीलाम करने दो बार टेंडर की प्रक्रिया अपनाई गई लेकिन इस चावल का कोई खरीददार नहीं मिला अब उसे नष्ट करना ही एकमात्र विकल्प है।
सुकमा कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि मामले की जांच के संबंध में सम्बधित विभाग को निर्देशित कर शीघ्र मामला का निराकरण करने की बात कही।
दो कलेक्टर बदले अब तीसरी की …?
चावल मामले में दो कलेक्टर को संज्ञान में लाया था लेकिन किसी ने गरीबों का चावल कैसे सड़ गया उस पर गंभीरता नहीं दिखाई। जिम्मेदार अधिकारी को बचाने रिश्तेदारी निभाई गई और लापरवाह अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के बजाय उसे ही जांच की जिम्मेदारी सौंप दी गई। अब जिले के नए तेज तर्रार आईएएस अफसर के भी संज्ञान में मामला लाया जा चुका है।
*गीदम में 18 करोड़ का चावल नष्ट*
बस्तर संभाग के ही दंतेवाड़ा जिले के गीदम वेयर हाउस से चावल पीडीएस दुकानों के लिए सुकमा, बीजापुर भी भेजा जाता है। विभाग की लापरवाही के कारण इस गोदाम में रखा 18 करोड़ से अधिक का चावल खराब हो चुका है। दवा के छिड़काव के कारण 30 हजार क्विंटल चावल को कैप कवर कर दिया गया है। यहां पर 50 से 60 हजार क्विंटल चावल रखा हुआ है। यह चावल दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है। सुकमा से भी चावल मामले को सुलझा नहीं पाए अब यह दंतेवाड़ा में आकर चावल मामले में उलझ गए हैं। वहीं कांग्रेसी नेता भी मामले की पड़ताल करने वेयर हाउस पहुंचे और उन्होंने चावल की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। गीदम वेयर हाउस में 30 हजार क्विंटल से अधिक चावल खराब होने के मामले में कलेक्टर से संपर्क कर जांच में क्या कार्रवाई की गई को लेकर प्रतिक्रिया जाने का प्रयास किय तो उनका मोबइल लगातार व्यस्त रहा।
*बस्तर में बंट रहा घटिया चावल*
इधर बस्तर जिले की कई राशन दुकानों में घटिया चावल का वितरण किया जा रहा है। बकावंड ब्लॉक की कई राशन दुकानों के चावल में फफूंद लगे नजर आए। यही अमानक स्तर का चावल गरीबों को वितरण किया जा रहा था जिसको लेकर कई कार्ड धारकों ने आपत्ति भी की, लेकिन उनका सुनने वाला कोई नहीं है। खासतौर से जैन राईस मिल धमतरी के लाट नम्बर 32421 मिल आईडी एमए591708, विमल राईस मिल धमतरी के लाट नं. 18153 मिल आईडी 597451 का चावल अमानक स्तर का पाया गया है। वहीं नमक के पैकेट में पैकिंग तिथि भी गायब है। बस्तर अंचल में पीडीएस प्रणाली विपक्ष को बैठे बिठाए मुद्दा दे गया है।
*जगदलपुर शहर का ये हाल!*
बस्तर में धान संग्रहण में काफी अनियमितताएं सामने आने के बाद भी अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने सामने आकर इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों से सवाल जवाब नहीं किया है। अब यहां पीडीएस की दुकानों से जो राशन आम गरीब लोगों को दिए जाते है उसमें भी काफी अनियमितताएं सामने आ रही हैं। जगदलपुर की दर्जनों पीडीएस दुकानों से मिलने वाले राशन आम लोगों तक पहुंचने से पहले ही व्यपारियों के गोदामों में पहुंच रहा है। जानकारी के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को ये पीडीएस दुकान संचालक राशन देने के नाम पर चक्कर लगवाते हैं। इससे जिससे परेशान होकर गरीब वहां जाना ही छोड़ देते हैं। उनके हिस्से के राशन की दुकानदार कालाबाजारी करते हैं। एक बड़ी बात यह भी सामने आई है कि ये पीडीएस दुकान संचालक कार्ड धारकों से उनके राशन 10 से 12 रुपए के भाव में लेकर वे बाहर 20 से 25 रुपए की दर पर बेच देते हैं। सीधे दुगने दामों में बेच कर वे गरीबों के पेट पर डाका डाल रहे हैं।
*बॉक्स*
*शिकायत कर चुके हैं गुप्ता*
इस मामले में दीनदयाल उपाध्याय वार्ड के पार्षद और वरिष्ठ भाजपा नेता सुरेश गुप्ता ने राशन की कालाबाजारी के मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि ऎसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। नगर निगम जगदलपुर कई मेयर इन काउंसिल में जल विभाग के सभापति सुरेश गुप्ता ने बताया कि उन्होंने राशन वितरण में गड़बड़ी और लापरवाही की शिकायत कई बार विभाग में दर्ज कराई है लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।






