*अर्जुन झा*
*जगदलपुर।* वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा सरगीपाल काष्ठागार डिपो, जगदलपुर में तेंदूपत्ता शाखकर्तन (बूटा कटाई) एवं अग्नि सुरक्षा विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि विधायक जगदलपुर किरण देव उपस्थित रहे।
कार्यशाला का उद्देश्य तेंदूपत्ता उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार, वैज्ञानिक पद्धति से शाखकर्तन की जानकारी देना और वनाग्नि से होने वाले नुकसान की रोकथाम हेतु जागरूकता बढ़ाना था। मुख्य अतिथि ने वन संरक्षण, तेंदूपत्ता संग्राहकों की भूमिका और अग्नि सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया। कार्यशाला में वन मंडलाधिकारी बस्तर उत्तम कुमार गुप्ता, उप वन मंडलाधिकारी जगदलपुर देवलाल दुग्गा, उप वन मंडलाधिकारी बस्तर इंद्र प्रसाद बंजारे, उप वन मंडलाधिकारी चित्रकोट योगेश कुमार रात्रे, उप प्रबंध संचालक जिला यूनियन जगदलपुर गुलशन कुमार साहू, प्रशिक्षु सहायक वन संरक्षक शिवेंद्र सिंह एवं समस्त वन परिक्षेत्र अधिकारी बस्तर वन मंडल विशेष रूप से उपस्थित रहे।कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा तेंदूपत्ता की सही समय पर और उचित विधि से बूटा कटाई करने की तकनीक, उसके लाभ और वन संरक्षण पर इसके सकारात्मक प्रभावों की जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त ग्रीष्मकाल में संभावित वनाग्नि की रोकथाम, प्रारंभिक आग नियंत्रण उपाय एवं अग्नि सुरक्षा से संबंधित व्यवहारिक जानकारियां भी साझा की गईं। इस अवसर पर गत वर्ष तेंदूपत्ता संग्रहण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले फड़ मुंशियों को गेंदे की माला पहनाकर सम्मानित किया गया। साथ ही चक्रीय निधि से लोन प्राप्त करने वाले हितग्राहियों, स्व सहायता समूह एवं बीमा लाभ प्राप्त करने वाले तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को डेमो चेक मुख्य अतिथि किरण देव ने प्रदान किए। इससे सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल को बल मिला।कार्यशाला में समस्त फड़ मुंशी, समस्त फड़ अभिरक्षक, समस्त पोषक अधिकारी, समस्त प्रबंधक एवं समस्त अस्थायी अग्नि प्रहरी भी उपस्थित थे। प्रतिभागियों से वनाग्नि की घटनाओं की तत्काल सूचना देने और सामूहिक प्रयासों से वन एवं पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान देने की अपील की गई। कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया गया। यह कार्यशाला वन संरक्षण, आजीविका संवर्धन और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सार्थक पहल के रूप में दर्ज की गई।




