दुर्ग/धमधा। धमधा थाना क्षेत्र के अंतर्गत श्रेया अस्पताल में उपचार के दौरान एक महिला की मौत के मामले में अस्पताल प्रशासन की गंभीर उदासीनता सामने आई है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद अस्पताल के डॉक्टर अभिषेक पांडे और प्रबंधक मनीष राजपूत के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।
मिली जानकारी के अनुसार ऑपरेशन के बाद महिला की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई, लेकिन समय रहते समुचित इलाज उपलब्ध नहीं कराया गया। परिजनों का आरोप है कि जब महिला की हालत नाजुक हो गई, तब उसे बिना डॉक्टर की निगरानी और अपर्याप्त संसाधनों वाली एंबुलेंस से दूसरे अस्पताल रेफर किया गया। वहां उपचार के दौरान महिला ने दम तोड़ दिया।
इस मामले को लेकर स्थानीय अधिवक्ताओं ने पुलिस द्वारा लगाए गए धाराओं पर कड़ा ऐतराज जताया है। वकीलों का कहना है कि पुलिस ने इसे हल्की धाराओं में दर्ज किया है, जबकि यह मामला छत्तीसगढ़ चिकित्सा सेवा संस्थान (नियमन एवं नियंत्रण) अधिनियम, 2010 के तहत गंभीर आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आता है।
अधिवक्ताओं के अनुसार अधिनियम की धारा 13 में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी अस्पताल या क्लिनिकल संस्था की लापरवाही से मरीज की स्थिति बिगड़ती है या मृत्यु होती है, तो संबंधित संस्था का लाइसेंस निरस्त करने के साथ दंडात्मक कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा, बिना आवश्यक संसाधन, डॉक्टर और जीवन रक्षक उपकरणों के मरीज को रेफर करना भी कानून का सीधा उल्लंघन है।
वकीलों ने यह भी बताया कि इस मामले में धारा 7(1) के तहत भी अपराध बनता है, जिसमें पीड़ित पक्ष को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष शिकायत और आपराधिक कार्रवाई का अधिकार दिया गया है। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में गंभीर धाराएं नहीं जोड़ी गईं, तो वे न्यायालय का रुख करेंगे।
