****अर्जुन झा****
*जगदलपुर।* छत्तीसगढ़ शासन एवं भारत सरकार की मंशा के अनुरूप स्थानीय समाज, पुलिस, प्रशासन तथा सुरक्षा बलों द्वारा क्षेत्र में शांति स्थापित करने, पुनर्वास सुनिश्चित करने और समावेशी विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में की जा रही पहल के तहत आज बस्तर के सुकमा जिले में एक अहम उपलब्धि दर्ज गई। “पूना मारगेम, पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के अंतर्गत आज सुकमा जिल्व में 10 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें 6 महिला नक्सली शामिल हैं तथा इन पर कुल 33 लाख का इनाम घोषित है। इन नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
इन आत्मसमर्पित नक्सली कैडरों ने 1 एके -47, 2 एसएलआर राइफलें, 1 स्टेन गन, 1 बीजीएल लांचर, एक स्टेन गन भी सुरक्षा बलों के समक्ष जमा किए हैं, हथियार जमा करने पर कुल 08 लाख का इनाम घोषित है। समर्पण करने वालों में पीएलजीए बटालियन नंबर 1 के प्लाटून कमांडर, दरभा डिवीजन के 2 एरिया कमेटी सदस्य, पीएलजीए मिलिट्री प्लाटून नंबर 31 के 1 पीपीसीएम सदस्य, पीएलजीए मिलिट्री प्लाटून नंबर 26 का एक पीपीसीएम सदस्य, गोल्लापल्ली एलओएस के 2 सदस्य और 3 पार्टी सदस्य शामिल हैं।इन सभी 10 नक्सलियों ने समाज की मुख्यधारा से जुड़कर शांति और विकास का मार्ग अपनाने का दृढ़ निर्णय लिया है। सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया कि आज 12 दिसंबर को सुकमा में इनामी 33 लाख के 10 सक्रिय माओवादियों द्वारा आत्मसमर्पण किया गया है।
एसपी श्री चव्हाण ने यह जानकारी भी दी कि आज की कार्रवाई के को मिलाकर वर्ष 2025 में जिले में कुल 263 माओवादी कैडर हिंसा त्यागकर मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। यह आंकड़ा बताता है कि क्षेत्र में विश्वास, शांति और विकास की प्रक्रिया लगातार गति पकड़ रही है।
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*हिंसक विचारधारा का अंत निकट:* आईजी
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पत्तिलिंगम ने कहा है कि सुकमा जिले में 10 माओवादी कैडरों का पुनर्वास यह दर्शाता है कि हिंसक और जनविरोधी माओवादी विचारधारा का अंत अब निकट है। लोग ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ पहल पर भरोसा जताते हुए शांति, गरिमा और स्थायी प्रगति का मार्ग चुन रहे हैं। छत्तीसगढ़ शासन, भारत सरकार, बस्तर पुलिस, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बल क्षेत्र में शांति स्थापित करने, पुनर्वास सुनिश्चित करने और समावेशी विकास को आगे बढ़ाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं। आईजी ने बताया कि पिछले 11 महीनों में बस्तर रेंज में 1514 से अधिक माओवादी कैडर हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। आईजी श्री पत्तिलिंगम ने कहा कि शेष माओवादी कैडर, जिनमें पॉलित ब्यूरो सदस्य देवजी, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य पाप्पा राव, देवा उर्फ बारसे देवा तथा अन्य शामिल हैं, के पास हिंसा त्यागकर मुख्यधारा में शामिल होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। सरेंडर प्रक्रिया के दौरान सुकमा का स्थानीय समाज, आईजी सुंदरराज पत्तिलिंगम, कलेक्टर देवेश ध्रुव,एसपी किरण चव्हाण, सीआरपीएफ के डीआईजी आनंद सिंह सहित समाज प्रमुख, मीडियाकर्मी, पुलिस के अधिकारी और बड़ी संख्या में जवान उपस्थित रहे।
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*नक्सलियों ने रोपे पौधे*
“पूना मारगम: पुनर्वास से सामाजिक पुनर्समावेशन” पहल के तहत आज वायान वाटिका सुकमा में एक महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें आज समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए 10 माओवादी कैडरों ने वे पौधे रोपे, जिन्हें समुदाय के वरिष्ठजनों ने पुनर्समावेशन के प्रतीक के रूप में उन्हें प्रदान किया था। सुकमा में स्थानीय समुदाय के वरिष्ठजनों की उपस्थिति में पुनर्वासित माओवादी कैडरों द्वारा किए गए पौधारोपण ने आशा और शांतिपूर्ण भविष्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का एक सशक्त प्रतीक प्रस्तुत किया। सुकमा स्थित पुनर्वास केंद्र के पौधरोपण स्थल का नाम “वायान वाटिका” रखा गया है, जिसका अर्थ स्थानीय आदिवासी गोंडी भाषा में “आशा और भविष्य की बगिया” होता है। वायान वाटिका में आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम सुकमा जैसे क्षेत्र जो लंबे समय तक अनिश्चितता से प्रभावित रहे, ऐसे क्षेत्र में विश्वास-निर्माण प्रक्रियाओं के गहराते स्वरूप को प्रतिबिंबित करता है।
