*****अर्जुन झा*****
*जगदलपुर।* ग्रामसभा के संवैधानिक प्रावधानों की जानकारी और अपने अधिकारों को लेकर सुकमा जिले की ग्राम पंचायत डब्बाकोंटा में पेसा कानून और अन्य मुद्दों को लेकर विशेष बैठक रखी गई। बैठक में कोंटा ब्लॉक की विभिन्न पंचायतों के ग्रामीण बड़ी संख्या में एकत्रित हुए।
इस विशेष सामाजिक जनसभा में ग्रामीण अपने-अपने गांवों की समस्याओं को लेकर पहुंचे थे। उनके समाधान को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में सुकमा जिले के जनप्रतिनिधि, सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारी, सामाजिक प्रतिनिधि तथा विभिन्न गांवों के पटेल, पुजारी, पेरमा, मांझी, चालकी और कोटवार प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

*तेंदूपत्ता खरीदी में गड़बड़ी पर चिंता*
जनसभा में सबसे प्रमुख मुद्दा तेंदूपत्ता खरीदी में हो रही अनियमितता का रहा। ग्रामीणों ने बताया कि शासन के नियमों के अनुसार तेंदूपत्ता की खरीदी अंतिम पत्ते तक की जानी चाहिए, ताकि आदिवासी परिवारों को पूरी मजदूरी और आय मिल सके। लेकिन वास्तविकता यह है कि कई स्थानों पर केवल तीन से चार दिन खरीदी करने के बाद केंद्र बंद कर दिए जाते हैं, जिससे हजारों बंडल तेंदूपत्ता जंगल में ही रह जाता है और सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित होती है। ग्रामीणों ने इसे सीधे तौर पर उनकी जीविका पर हमला बताया। ग्रामीणों ने जनसभा में वन भूमि के सीमांकन और सर्वे कार्य को लेकर भी कड़ा विरोध जताया। उनका आरोप है कि पूर्वजों द्वारा तय की गई पारंपरिक सीमाओं को नजरअंदाज कर खेतों के भीतर जबरन सीमांकन और सर्वे किया जा रहा है, जिससे किसानों की निजी भूमि को वन भूमि में दर्ज किए जाने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया ग्रामसभा की अनुमति के बिना की जा रही है, जो सीधे तौर पर पेसा कानून और वन अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है।
*बॉक्स*
*मनीष कुंजाम ने आरोप लगाए*
पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद पनपने का सबसे बड़ा कारण वन विभाग की गलत नीतियां और कार्यप्रणाली रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक आदिवासियों के अधिकारों की अनदेखी की गई, जिससे क्षेत्र में असंतोष बढ़ा। उन्होंने यह भी कहा कि आज भी कई स्थानों पर ग्रामीणों को केवल 2 हेक्टेयर का ही पट्टा दिया जा रहा है, जबकि जरूरत के अनुसार 10 एकड़ तक भूमि का अधिकार मिलना चाहिए और बाहरी ठेकेदारों और व्यापारियों पर फर्जी तरीके से जमीन खरीदी करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, खासकर बस्तर क्षेत्र में स्थानीय आदिवासियों की जमीन को छल-कपट से खरीदा जा रहा है। उन्होंने बस्तर में स्वीकृत रेल परियोजना को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह परियोजना स्थानीय विकास के लिए नहीं, बल्कि बैलाडीला की खनिज संपदा को बाहर ले जाने की सोच से तैयार की जा रही है, जिसका आदिवासी समाज को कोई लाभ नहीं मिलने वाला।
*बॉक्स*
*योजनाओं में फर्जीवाड़ा: वेको हुंगा*
वेको हुंगा ने कहा कि पहले बस्तर में नक्सलवाद होने के कारण वनकर्मी योजनाओं का लाभ आदिवासियों तक नहीं पहुंच पाते थे, लेकिन अब नक्सलवाद लगभग समाप्त हो गया है और कुछ लोग योजनाओं का लालच लेकर उन्हें गलत तरीके से वितरित कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सामूहिक पट्टा और सीमांकन पट्टा तैयार नहीं होगा, तब तक आदिवासियों को उनके खनिज संपदा का सही लाभ नहीं मिलेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ आदिवासी नेता आदिवासियों का हनन करते हुए सत्ता का पक्ष लेकर योजनाओं का लाभ अपने स्वार्थ के लिए पैसे में बेच रहे हैं।
*बॉक्स*
*ग्रामीणों से उमेश सूंडम की अपील*
सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष उमेश सुंडम ने सभी ग्रामीणों से अपील की कि जिनका नाम अभी तक एसआईआर की आधिकारिक सूची में दर्ज नहीं है, वे तुरंत अपना नाम जोड़वाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति का नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होगा, तो उसे किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलेगा, चाहे वह आवास, पेंशन, तेंदूपत्ता या कोई अन्य योजना हो। सुंडम ने आगे कहा कि नाम दर्ज न होने की स्थिति में व्यक्ति को छत्तीसगढ़ का विधिवत निवासी होने का अधिकार भी नहीं मिलेगा, इसलिए सभी ग्रामीणों से अनुरोध है कि वे इस प्रक्रिया को गंभीरता से लें और तुरंत अपनी जानकारी अपडेट करवाएँ।
*कार्यक्रम में ये रहे मौजूद*
कार्यक्रम में पूर्व विधायक मनीष कुंजाम, सर्व आदिवसी समाज के संभागीय उपाध्यक्ष वेको हुंगा, सुकमा जिला सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष उमेश सुंडम, अधिवक्ता भीमा पोडियम, सोयम भीमा जनपद सदस्य, माड़वी हिडमा जनपद पंचायत उपाध्यक्ष, कोंटा रेंजर महेश पासवान, जगरगुंडा एसडीओ भट्ट एवं शासकीय कर्मचारी सहित ग्रामीण मौजूद रहे।
