दुर्ग, 24 नवम्बर। दुर्ग जिले को आईटी एवं टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में आज अहम कदम उठाया गया। आईआईटी भिलाई और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच जिले में प्रथम आईटी पार्क की स्थापना को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते पर आईआईटी भिलाई के निदेशक डॉ. राजीव प्रकाश और नगर निगम दुर्ग आयुक्त सुमीत अग्रवाल ने हस्ताक्षर किए। यह पार्क शहर के सिविल लाइन्स क्षेत्र में लगभग 3,900 वर्ग मीटर भूमि पर विकसित किया गया है, जिसका निर्मित क्षेत्र 2,907.26 वर्ग मीटर है।
कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, महापौर अलका बाघमार और कलेक्टर अभिजीत सिंह उपस्थित रहे। मंत्री यादव ने कहा कि यह पहल युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और नवाचार की नई दिशा तय करेगी, जिससे अब स्थानीय युवा बड़े शहरों की ओर पलायन से बच सकेंगे। उन्होंने इसे प्रदेश के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया।
जानकारी के अनुसार, देश और प्रदेश की करीब 35 कंपनियों ने आईटी पार्क में स्टार्टअप और कार्यालय स्थापित करने में रुचि दिखाई है। पार्क में एक साथ 200 से अधिक लोगों के कार्य करने की सुविधा, 40 ऑफिस रूम, पाँच बड़े हॉल, मैस और सुरक्षित परिसर उपलब्ध है।
कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा कि यह शुरुआत भले छोटी दिखे, लेकिन आने वाले समय में यह बड़े अभियान का रूप लेगी और दुर्ग-भिलाई को आईटी एवं सर्विस सेक्टर के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। महापौर अलका बाघमार ने इसे युवाओं के लिए तकनीकी अवसरों का नया द्वार बताया।
आईआईटी निदेशक डॉ. राजीव प्रकाश ने कहा कि उद्देश्य यह है कि प्रदेश के युवाओं को अपने ही शहर में प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और रोजगार मिल सके। उन्होंने बताया कि पार्क में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, डेटा एनालिटिक्स, फिनटेक, रोबोटिक्स, एआई और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा दिया जाएगा।
आईटी पार्क के शुरू होने से स्थानीय कंपनियों को कुशल मैनपावर मिलेगा, स्टार्टअप संस्कृति मजबूत होगी और जिले में रोजगार सृजन की गति बढ़ेगी। यह पहल दुर्ग-भिलाई को भविष्य में एक अग्रणी तकनीकी और नवाचार केंद्र बनाने की दिशा में निर्णायक कदम मानी जा रही है।
