*अर्जुन झा*
*जगदलपुर।* बस्तर संभाग के बीजापुर के पेद्दाकोडे़पाल के जंगलों में कूप कटाई और छंटाई के नाम पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है। अब तक सैकड़ों पेड़ काटे जा चुके हैं। वन विभाग के इस कदम का ग्रामीण पुरजोर विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ और अन्य वनोपज हमारी आजीविका के साधन हैं, हम पेड़ कटने नहीं देंगे। वहीं वन विभाग का कहना है कि सूखे और खराब हो चुके पेड़ों को काटा जा रहा है। इन पेड़ों की लकड़ियों को नीलाम कर जो राशि मिलेगी, उसका 20 प्रतिशत हिस्सा गांव के विकास पर खर्च किया जाएगा।
पेद्दाकोडे़पाल क्षेत्र के जनपद सदस्य अनिल कोरसा व ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग कूप कटाई व छंटाई के नाम पर सैकड़ों पेड़ों को काट रहा है। यह आदिवासी जन जीवन के साथ खिलवाड़ है। ग्रामीणों ने विभाग के गार्ड से जब इस संबंध में जानकारी ली तो यह बताया गया कि सूख चुके और सड़ रहे पेड़ों का कटाई व छंटाई का काम चल रहा है। ऐसे जवाब से गुस्साए ग्रामीणों ने जब जंगल में जाकर देखा तो सैकड़ों जीवित पेड़ों को कटी हालत में पाया। इन पेड़ों में महुआ, तेंदू, चार आदि प्रजाति के फलदार वृक्ष कटे पाए गए। नाराज ग्रामीणों ने काम बंद करने का आग्रह किया। जनपद सदस्य अनिल कोरसा ने बताया कि ये कटे हुए सैकड़ों पेड़ ग्रामीणों की आय का साधन व आर्थिक स्त्रोत हैं। यहां रहवासी वनोपजों से अपने घर चलाते हैं। बिना ग्रामसभा की सहमति के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई करने पर ग्रामीणों ने विरोध जताया। तथा जंगल काटने से मना किया। ग्रामीणों का कहना है कि इन पेड़ों के कटने के बाद जंगल के भरोसे रहने वाले आदिवासी कहा जाएंगे, कैसे जीवन यापन करेंगे? ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग द्वारा ग्रामीणों की सहमति के बगैर बड़ी तादाद में फलदार पेड़ों को काट कर हमारे जन जीवन को प्रभावित करना चाहती है। ग्रामीणों ने इस मामले में डीएफओ रामाकृष्णन के समक्ष भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और साफ साफ कहा कि हमारे प्राकृतिक संसाधन के साथ खिलवाड़ न किया जाए। ग्रामीण व जनप्रतिनिधि जंगल कटाई के संबंध में कलेक्टर से मिल कर अपनी बात रखने वाले हैं।
*पेड़ों की कटाई रूटीन प्रक्रिया*
खराब हो चुके और सूख चुके पेड़ों की कटाई वन विभाग की एक रूटीन प्रक्रिया है प्रक्रिया है। इसी के तहत कटाई व छंटाई का कार्य किया जा रहा है। ग्रामीणों का विरोध गलत है। इन सूखे पेड़ों की लकड़ियों को नीलाम किया जाएगा और नीलामी से प्राप्त राशि का 20 प्रतिशत हिस्सा गांव के विकास पर खर्च होगा।
*-श्री रामकृष्णन,*
डीएफओ, बीजापुर



