कोलकाता, 23 फरवरी (दुर्ग भिलाई अपडेट)। पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय का देर रात 2:35 बजे निधन हो गया। वे 72 वर्ष के थे। लंबे समय से कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे और पिछले कुछ महीनों से कोमा में थे। डॉक्टरों के अनुसार उनकी मृत्यु कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई।
लंबे समय से थे बीमार
पिछले कुछ वर्षों से मुकुल रॉय की तबीयत लगातार खराब चल रही थी। वर्ष 2023 की शुरुआत में डॉक्टरों ने पुष्टि की थी कि वे डिमेंशिया और पार्किंसंस जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। इन बीमारियों के कारण उनकी स्मरण शक्ति और शारीरिक क्षमताएं काफी प्रभावित हुई थीं, जिससे वे सक्रिय राजनीति से दूर हो गए थे।
TMC के रणनीतिकार और ‘बंगाल के चाणक्य’
All India Trinamool Congress में मुकुल रॉय को लंबे समय तक Mamata Banerjee के बाद नंबर-2 नेता माना जाता था। उन्हें पार्टी का ‘क्राइसिस मैनेजर’ और कुशल रणनीतिकार कहा जाता था। चुनावी रणनीति तैयार करने और संगठन को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में उन्हें ‘बंगाल का चाणक्य’ भी कहा जाता था।
राजनीतिक सफर: TMC से BJP और फिर वापसी
2015 में पार्टी के नेशनल जनरल सेक्रेटरी पद से हटाए गए।
सितंबर 2017 में TMC से इस्तीफा दिया।
नवंबर 2017 में Bharatiya Janata Party (भाजपा) में शामिल हुए।
2019 से 2021 तक भाजपा में सक्रिय भूमिका निभाई।
जून 2021 में फिर से TMC में वापसी की।
शारदा चिटफंड घोटाले सहित कई राजनीतिक विवादों के बाद उनका TMC से रिश्ता बिगड़ा था।
नेताओं ने जताया शोक
भाजपा नेता Dilip Ghosh ने उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा कि मुकुल रॉय एक अनुभवी राजनेता थे और केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
एक युग का अंत
मुकुल रॉय के निधन को पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। उनके रणनीतिक कौशल और संगठनात्मक क्षमता ने राज्य की राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित किया।
