कोटा, 08 फरवरी (दुर्ग भिलाई अपडेट):
राजस्थान की शिक्षा नगरी कोटा में शनिवार रात एक भीषण हादसे ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। जवाहर नगर थाना क्षेत्र के इंदिरा विहार इलाके में स्थित एक दो मंजिला निर्माणाधीन भवन अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे में मलबे के नीचे दबने से एक कोचिंग छात्र समेत दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 13 लोग घायल हो गए।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों, पुलिस और प्रशासन की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, जिसे देर रात तक पूरा कर लिया गया। मलबे में फंसे सभी लोगों को बाहर निकाल लिया गया है। घायलों में से 5 को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि 8 का इलाज अभी अस्पताल में जारी है।
रेस्टोरेंट में मौजूद थे 30–40 लोग
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा रात करीब 8:45 बजे हुआ। जिस इमारत में यह घटना हुई, वहां ‘दिल्ली नॉनवेज’ नाम से एक रेस्टोरेंट संचालित हो रहा था। उस वक्त रेस्टोरेंट में ग्राहकों और कर्मचारियों सहित करीब 30 से 40 लोग मौजूद थे। अचानक इमारत गिरने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए मलबे में दबे लोगों को निकालने का प्रयास शुरू कर दिया और कई घायलों को एंबुलेंस के पहुंचने से पहले ही अस्पताल भिजवाया।
मृतकों की पहचान में विरोधाभास
हादसे में जान गंवाने वालों में पश्चिम बंगाल निवासी अरण्य शामिल है, जो कोटा में एलेन कोचिंग संस्थान का छात्र था। दूसरे मृतक की उम्र 13–14 वर्ष बताई जा रही है, जिसकी पहचान को लेकर जांच जारी है। वहीं मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार एक मृतक की पहचान 23 वर्षीय भूपेंद्र, निवासी कोटा, के रूप में भी की गई है। पुलिस सभी तथ्यों की पुष्टि में जुटी है।
क्रेन देरी से पहुंचने पर लोगों में नाराजगी
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए। उनका कहना था कि मलबा हटाने के लिए क्रेन करीब डेढ़ घंटे की देरी से मौके पर पहुंची, जिससे राहत कार्य प्रभावित हुआ। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन पूरे इलाके की बिजली सप्लाई बंद कर दी।
मौके पर पहुंचे मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी
घटना की जानकारी मिलते ही जिला कलेक्टर पीयूष सांवरिया और अतिरिक्त जिला कलेक्टर अनिल सिंघल मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने भी अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की।
निर्माणाधीन भवन में व्यावसायिक गतिविधियां जांच के घेरे में
चश्मदीद छात्रों ने बताया कि वे खाना खा ही रहे थे कि अचानक पूरी इमारत ढह गई। राहत टीम ने समय रहते करीब 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब भवन का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ था, तो उसमें रेस्टोरेंट जैसी व्यावसायिक गतिविधियां कैसे संचालित हो रही थीं। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
