नई दिल्ली, 27 जनवरी (दुर्ग भिलाई अपडेट)।
कर्तव्यनिष्ठा और मानवता की मिसाल पेश करते हुए आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (APSRTC) के एक बस चालक ने अपनी जान गंवाकर 18 यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया। हैदराबाद से विजयवाड़ा जा रही अमरावती एसी बस के चालक को हाईवे पर ड्राइविंग के दौरान अचानक दिल का दौरा पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने घबराने के बजाय यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
यह हृदयविदारक घटना हैदराबाद–विजयवाड़ा नेशनल हाईवे पर चौटुप्पल क्षेत्र के पास हुई। बस चला रहे 39 वर्षीय कटरापु नागराजू विजयवाड़ा के गोल्लापुड़ी निवासी थे। उस वक्त बस में कुल 18 यात्री सवार थे।
भीषण दर्द में भी नहीं छोड़ा स्टीयरिंग
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक सीने में तेज दर्द उठने के बाद भी नागराजू ने खुद पर काबू बनाए रखा। असहनीय पीड़ा के बावजूद उन्होंने चलती बस का संतुलन नहीं बिगड़ने दिया और तेज रफ्तार बस को सावधानीपूर्वक मुख्य सड़क से हटाकर सर्विस रोड पर मोड़ दिया।
पहले यात्रियों की सुरक्षा, फिर खुद की चिंता
नागराजू ने बस को सड़क किनारे सुरक्षित स्थान पर रोककर ब्रेक लगाया, जिससे सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित रहे। इसके बाद वे इलाज के लिए पास के एक निजी क्लिनिक की ओर बढ़े, लेकिन कुछ ही दूरी पर चलते हुए बेहोश होकर गिर पड़े। यात्रियों और स्थानीय लोगों ने तुरंत मदद की और उन्हें ऑटो-रिक्शा से एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे। इसके बाद चौटुप्पल सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां ईसीजी जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
यात्रियों की जुबानी — ‘हमारे लिए वह सच्चे हीरो थे’
बस में सवार एक यात्री ने भावुक होते हुए कहा,
“अपने आखिरी पलों में भी नागराजू ने सिर्फ हमारी चिंता की। वे चाहें तो सीधे अस्पताल की ओर बस मोड़ सकते थे, लेकिन उन्होंने पहले सभी यात्रियों को सुरक्षित किया। अगर वे हिम्मत हार जाते, तो हाईवे पर बड़ा हादसा हो सकता था।”
परिवार के लिए अपूरणीय क्षति, सिस्टम पर उठे सवाल
नागराजू अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। उनकी असमय मौत ने एक बार फिर लंबी दूरी के बस चालकों की सेहत, अत्यधिक तनाव, लंबी ड्यूटी और कार्य परिस्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गौरतलब है कि जनवरी 2026 में यह ऐसी दूसरी घटना है, जब बस चालक ने यात्रियों की जान बचाई, लेकिन खुद जिंदगी की जंग हार गया।
