नई दिल्ली, 21 जनवरी (दुर्ग भिलाई अपडेट)। भारत 26 जनवरी को अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे देश में उत्साह और गौरव के साथ मनाएगा। इस अवसर पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाली भव्य परेड में भारत अपनी सैन्य, सांस्कृतिक और तकनीकी ताकत का प्रदर्शन करेगा। हर साल की तरह इस बार भी परेड में हजारों दर्शक शामिल होंगे और कई देशों की नजरें भारत की बढ़ती सामरिक क्षमता पर टिकी रहेंगी।
इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सेंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन कर्तव्य पथ पर मौजूद रहेंगी। उनकी मौजूदगी भारत और यूरोप के बीच मजबूत होते रणनीतिक संबंधों को दर्शाती है।
गणतंत्र दिवस परेड में सभी राज्यों की रंग-बिरंगी झांकियों के साथ-साथ थलसेना, नौसेना और वायुसेना की झांकियां भी निकलेंगी, जिनमें भारत की आधुनिक सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन किया जाएगा। इस बार परेड का सबसे बड़ा आकर्षण पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाने वाली भारत की लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल होगी, जिसे डीआरडीओ ने विकसित किया है।
यह अत्याधुनिक मिसाइल लगभग 1500 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है और दुश्मन के समुद्री ठिकानों को सटीक निशाना बना सकती है। हाइपरसोनिक गति से उड़ान भरने के कारण यह दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी तैनाती से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पकड़ और भी मजबूत होगी।
यह मिसाइल विभिन्न प्रकार के पेलोड ले जाने में सक्षम है और दुश्मन के युद्धपोतों व उनकी हथियार प्रणालियों को नष्ट करने में अहम भूमिका निभा सकती है। नौसैनिक युद्ध के लिहाज से इसे बेहद घातक हथियार माना जा रहा है।
परियोजना निदेशक ए. प्रसाद गौड के अनुसार, डीआरडीओ हाइपरसोनिक ग्लाइड और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है। गणतंत्र दिवस परेड में इसका प्रदर्शन आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है और यह साबित करता है कि भारत अत्याधुनिक रक्षा तकनीक के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है।
