फरीदाबाद | 12 जनवरी | दुर्ग भिलाई अपडेट
हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, ईडी मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत विश्वविद्यालय परिसर को कुर्क करने की तैयारी कर रही है। जांच एजेंसी को संदेह है कि विश्वविद्यालय की कई इमारतों के निर्माण में अपराध से अर्जित धन का इस्तेमाल किया गया।
ईडी की जांच में सामने आया है कि धौज क्षेत्र में स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय के भवनों के निर्माण में जिन फंड्स का उपयोग हुआ, वे कथित तौर पर अवैध स्रोतों से आए थे। इसी आधार पर एजेंसी विश्वविद्यालय की संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई पर गंभीरता से विचार कर रही है। यदि यह कदम उठाया जाता है, तो इसे अल-फलाह विश्वविद्यालय और उससे जुड़े ट्रस्ट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पिछले वर्ष लाल किले के पास हुए कार बम विस्फोट के बाद से अल-फलाह विश्वविद्यालय केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर है। इस घटना के बाद सुरक्षा और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई पहलुओं की जांच शुरू हुई, जिसमें अल-फलाह समूह से जुड़े संदिग्ध लेन-देन उजागर हुए। इसके बाद ईडी ने विश्वविद्यालय और उससे जुड़े ट्रस्ट की गतिविधियों की गहन जांच शुरू की।
जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या विश्वविद्यालय के निर्माण और संचालन में प्रयुक्त धन को अवैध स्रोतों से अर्जित कर शिक्षण संस्थानों में निवेश के जरिए वैध दिखाने की कोशिश की गई। ईडी का मानना है कि मामला सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं, बल्कि इसके पीछे मनी लॉन्ड्रिंग का एक संगठित और व्यापक नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
इस मामले में अल-फलाह समूह के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को ईडी ने नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया था। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं। ईडी का दावा है कि अल-फलाह ट्रस्ट द्वारा संचालित कुछ शिक्षण संस्थानों के पास आवश्यक वैध मान्यता नहीं थी, इसके बावजूद छात्रों से भारी फीस वसूली गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि छात्रों से वसूली गई राशि का उपयोग कथित तौर पर अन्य गतिविधियों और संपत्तियों के निर्माण में किया गया, जो PMLA के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर अब विश्वविद्यालय परिसर की कुर्की की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।
फिलहाल ईडी की ओर से कुर्की की तारीख या अंतिम आदेश को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जांच अंतिम चरण में है। यदि कुर्की की कार्रवाई होती है, तो इसका सीधा असर विश्वविद्यालय के संचालन, छात्रों की पढ़ाई और कर्मचारियों की नौकरी पर पड़ सकता है।
मामले को लेकर अब तक अल-फलाह विश्वविद्यालय या ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
