(दुर्ग भिलाई अपडेट) 10 जनवरी।
भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी दिन बिकवाली का दबाव बना रहा। वैश्विक संकेतों और अमेरिका से आ रही नकारात्मक खबरों के चलते निवेशकों में घबराहट देखने को मिली, जिसका सीधा असर बाजार पर पड़ा। गुरुवार को कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 780 अंक यानी 0.92 प्रतिशत की गिरावट के साथ 84,181 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 264 अंक या 1.01 प्रतिशत फिसलकर 25,877 पर आ गया।
पिछले चार कारोबारी सत्रों पर नजर डालें तो सेंसेक्स करीब 1600 अंकों की बड़ी गिरावट झेल चुका है। 2 जनवरी को जहां सेंसेक्स 85,762 के स्तर पर था, वहीं अब यह 84,180 के आसपास सिमट गया है। इसी अवधि में निफ्टी भी लगभग 400 अंक टूट चुका है।
बाजार में आई इस तेज गिरावट के पीछे अमेरिका में पेश किए गए एक नए विधेयक को बड़ी वजह माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से अमेरिका में एक नया बिल लाया गया है, जिसके तहत रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव के अंतर्गत भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसी आशंका ने भारतीय निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
तेज बिकवाली के चलते निवेशकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। बाजार बंद होने तक बीएसई का कुल मार्केट कैप करीब 8.11 लाख करोड़ रुपये घट गया। निवेशकों की कुल संपत्ति, जो पिछले सत्र में 479.94 लाख करोड़ रुपये थी, गिरकर 471.82 लाख करोड़ रुपये पर आ गई।
बाजार में गिरावट की अगुवाई दिग्गज शेयरों ने की। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एलएंडटी, टीसीएस, इंफोसिस, एसबीआई और एचडीएफसी बैंक जैसे बड़े शेयरों में दबाव देखा गया। सेंसेक्स के 30 में से केवल चार शेयर ही हरे निशान में बंद हो पाए। एलएंडटी में 3.35 प्रतिशत, टेक महिंद्रा में 2.94 प्रतिशत और टीसीएस में 2.74 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि जोमैटो और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में मामूली बढ़त रही।
