मोतीपुर बाजार स्थित वार्ड-13 के नेता रोड पर रविवार तड़के एक मकान में लगी आग ने बड़ा हादसा कर दिया। संदिग्ध परिस्थितियों में भड़की इस आग में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य झुलसकर गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। यह दुर्घटना दिवंगत गेना साह के मकान में हुई, जहां उनके दोनों बेटे—ललन साह और मुकेश उर्फ अर्जुन—ग्राउंड फ्लोर पर किराना दुकान चलाते हैं। पहली मंजिल पर बच्चों का निजी अस्पताल संचालित होता है और दूसरी मंजिल पर ललन साह अपने परिवार के साथ रहते थे।
हादसे के वक्त ललन अपने पत्नी और दो बेटियों के साथ एक कमरे में सो रहे थे, जबकि उनकी मां दूसरे कमरे में थीं। तीसरे कमरे में ललन के मामा-मामी और उनका बच्चा ठहरे हुए थे। ललन की बहन माला देवी भी उसी घर में सोई थीं। मुकेश नीचे दुकान के पास बने कमरे में आराम कर रहे थे। आग की सूचना मिलते ही मुकेश ने परिवार को बचाने का प्रयास किया, इस दौरान वे भी गंभीर रूप से झुलस गए।
सुबह लगभग चार बजे आसपास के लोगों ने चीख-पुकार सुनी तो दौड़कर पहुंचे। तब तक आग ऊपर की मंजिलों तक फैल चुकी थी और लोग भीतर फंसे हुए थे। तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। सौभाग्य से पहली मंजिल पर स्थित अस्पताल सुरक्षित रहा, जहां उस समय केवल एक अटेंडेंट मौजूद था।
घटना की जानकारी मिलते ही डीएसपी पश्चिमी सुचित्रा कुमारी और अंचलाधिकारी मौके पर पहुंचे। मृतकों में लालबाबू साह (45), पुष्पा देवी (42), माला देवी (28), साक्षी कुमारी (18) और अर्जुन कुमार (20) शामिल हैं।
**दीवार तोड़कर फायरफाइटरों ने पाया रास्ता, तब काबू में आई आग**
धुआं इतना ज्यादा था कि सीढ़ियों से ऊपर जाना नामुमकिन हो गया। फायर टीम ने पास के घर की छत से रास्ता बनाते हुए एसबेस्टस और दीवार तोड़ी, जिसके बाद अंदर पहुंचकर पानी की बौछार से आग बुझाई गई। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौके पर मौजूद रहे और बचाव दल की मदद करते रहे।
जिलाधिकारी ने तुरंत एसकेएमसीएच को अलर्ट कर दिया। अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. सतीश कुमार सिंह के अनुसार, झुलसे मरीजों में तीन की हालत बेहद गंभीर है—वे 70 फीसदी तक जले हैं, जबकि एक मरीज 80 फीसदी तक जल चुका है। एक घायाल को बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया है।
**नेपाल से आई माला देवी की आंखों देखी**
झुलसी माला देवी ने बताया कि वह अपने बीमार चाचा और बुआ की तबीयत जानने नेपाल से आई थी। सुबह करीब साढ़े चार बजे तेज धमाके जैसी आवाज हुई और वह घबराकर उठीं। कमरा धुआं व आग से घिर चुका था। बाहर निकलने की कोशिश में वे गिर गईं, लेकिन किसी तरह चाची पुष्पा के साथ बाहर निकल पाईं। भागते समय चाचा लालबाबू प्रसाद गंभीर रूप से झुलस गए।
स्थानीय प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है।
